देश की खबरें | नगालैंड ने आम नागरिकों की मौत के विरोध में हॉर्नबिल उत्सव समाप्त किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो के मंत्रिमंडल ने सेना की कार्रवाई में 14 आम नागरिकों के मारे जाने के विरोध स्वरूप हॉर्नबिल उत्सव को समाप्त करने का मंगलवार को फैसला किया।

कोहिमा, सात दिसंबर नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो के मंत्रिमंडल ने सेना की कार्रवाई में 14 आम नागरिकों के मारे जाने के विरोध स्वरूप हॉर्नबिल उत्सव को समाप्त करने का मंगलवार को फैसला किया।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार ने सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) कानून रद्द करने की मांग करते हुए केंद्र को पत्र लिखने का भी फैसला किया है।

राज्य का सबसे बड़ा पर्यटन आधारित मनोरंजन कार्यक्रम 10 दिवसीय हॉर्नबिल उत्सव राजधानी के समीप किसामा में नगा हेरिटेज विलेज में आयोजित किया जा रहा था। यह उत्सव 10 दिसंबर को खत्म होना था।

नगालैंड के मंत्री निबा क्रोनू और तेमजेन इम्ना अलोंग ने बाद में पत्रकारों को बताया कि एक आपात बैठक के दौरान मंत्रिमंडल को आम नागरिकों के मारे जाने के बाद उठाए गए कदमों की जानकारी दी गयी। इसमें आईजीपी रैंक के अधिकारी की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करना और राज्य तथा केंद्र सरकारों द्वारा मृतकों के परिजनों को अनुग्रह राशि देना शामिल है।

उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल ने एसआईटी को एक महीने के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया है। क्रोनू ने बताया कि घटना में कुल 14 नागरिकों की मौत हुई है, जबकि दो गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिनका पड़ोसी राज्य असम में इलाज चल रहा है और छह अन्य का दीमापुर में इलाज चल रहा है।

गौरतलब है कि गोलीबारी की घटनाएं चार दिसंबर को ओटिंग-तिरु में और पांच दिसंबर को मोन शहर में हुईं।

क्रोनू ने बताया, ‘‘मोन जिले में गोलीबारी की घटनाओं में मारे गए लोगों के लिए घोषित किए गए शोक के मद्देनजर हॉर्नबिल उत्सव 2021 की सभी गतिविधियां बंद की जानी चाहिए।’’

इस घोषणा के बाद उत्सव के मुख्य आयोजक पर्यटन विभाग ने नगा हेरिटेज विलेज में समापन समारोह आयोजित किया।

राज्य सरकार ने सोमवार को आयोजन स्थल पर उस दिन का कार्यक्रम रद्द कर दिया। पूर्वी नगालैंड और राज्य के अन्य हिस्सों की कई जनजातियों ने मोन जिले में आम नागरिकों की मौत पर सभी गतिविधियों को निलंबित कर दिया।

नागरिक समाज समूहों खासतौर से नगा छात्र संघ की अपील पर अलोंग ने कहा कि राज्य सरकार केवल अपील कर सकती है जबकि कानून निरस्त करने पर अंतिम फैसला केंद्र को लेना होगा। इन समूहों ने आफस्पा को निरस्त करने की मांग को लेकर एक विशेष प्रस्ताव पारित करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की अपील की है।

रियो ने सोमवार को मोन शहर में 14 आम नागरिकों के अंतिम संस्कार में भाग लेते हुए आफस्पा को निरस्त करने की मांगों का समर्थन किया। यह कानून ‘‘अशांत इलाकों’’ में सुरक्षाबलों को विशेष अधिकार देता है।

आलोचकों का कहना है कि यह विवादित कानून सशस्त्र बलों को दंडमुक्ति के साथ काम करने की अनुमति देता है, जिससे मानवाधिकार उल्लंघन होते हैं।

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