जरुरी जानकारी | म्यूचुअल फंड यूनिटधारकों को ऋणदाता, घर के खरीदार के समान नहीं माना जा सकता : न्यायालय

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नयी दिल्ली, 14 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को इस बात को ‘अनुचित और असंगत’ ठहराया कि म्यूचुअल फंड यूनिटधारक संबंधित कानून के तहत ऋणदाताओं या घर के खरीदारों के समान होते हैं।

शीर्ष अदालत ने यह निष्कर्ष अपना एक फैसला सुनाते हुए दिया। न्यायालय ने कहा कि म्यूचुअल फंड योजनाओं को बंद करने के लिए न्यासियों को नोटिस निकालकर अपने फैसले की वजह बतानी चाहिए और उसके बाद बहुलांश यूनिटधारकों की सहमति लेनी चाहिए।

न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर तथा न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने व्यवस्था दी कि सेबी को यह पता लगाने को कि न्यासियों ने अपने कर्तव्य का निर्वहन ठीक से किया है या नहीं, जांच या छानबीन का पूरा अधिकार है।

न्यायमूर्ति खन्ना द्वारा लिखे गए 77 पृष्ठ के फैसले में म्यूचुअल फंड योजनाओं को बंद करने के बारे में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के नियमनों के विभिन्न प्रावधानों की व्याख्या की गई है।

न्यायालय ने कहा कि यूनिटधारकों को ऋणदाताओं या घर खरीदारों के समान मानना अनुचित और असंगत है।

न्यायालय ने कहा कि यूनिटधारक निवेशक होते हैं जो जोखिम उठाते हैं और उन्हें लाभ या मुनाफा मिलता है। जोखिम उठाने की वजह से उन्हें नुकसान के लिए भी तैयार रहना चाहिए। यूनिटधारकों को कोई निश्चित रिटर्न नहीं मिलता है।

पीठ ने कहा कि वहीं ऋणदाता को परस्पर सहमति वाले अनुबंध के आधार पर निश्चित रिटर्न मिलता है। उनका रिटर्न ब्याज के रूप में होता है। ऋणदाता जोखिम उठाने वाले नहीं होते। इसके अलावा यूनिटधारकों को भारतीय दिवाला संहिता के तहत घर के खरीदार की तरह मानना भी एक काफी कमजोर दलील है। ‘‘घर के खरीदार बिल्डर को घर के लिए पैसा देते हैं। घर खरीदार म्यूचुअल फंड के निवेशक की तरह लाभ या हानि के जोखिम उठाने वाले नहीं होते।’’

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