देश की खबरें | मुंद्रा मादक पदार्थ बरामदगी मामला: एनआईए ने आरोपी व्यवसायी की जमानत अर्जी का विरोध किया

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नयी दिल्ली, 23 अप्रैल राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर 21,000 करोड़ रुपये के मादक पदार्थ की बरामदगी से जुड़े मामले में गिरफ्तार दिल्ली के एक व्यवसायी की जमानत अर्जी का उच्चतम न्यायालय में बुधवार को विरोध किया।

एनआईए ने दलील दी कि बिक्री से प्राप्त राशि का इस्तेमाल लश्कर-ए-तैयबा की आतंकवादी गतिविधियों के वित्त पोषण के लिए किया जाना था।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मामले में हरप्रीत सिंह तलवार उर्फ कबीर तलवार की जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

तलवार दिल्ली में कई लोकप्रिय क्लब का संचालन करता था। उसे अगस्त 2022 में मुंद्रा बंदरगाह पर 21,000 करोड़ रुपये के मादक पदार्थ की बरामदगी से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिसे भारत में मादक पदार्थों की सबसे बड़ी बरामदगी बताया जाता है।

एनआईए की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा, “ये लोग संगठन के मुखौटा कमांडर होते हैं, लेकिन इनके हाथ आतंकवादी हमलों में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों के खून से भी रंगे होते हैं।”

उन्होंने कहा कि यह भारत में अर्ध-प्रसंस्कृत टैल्क पत्थर के वैध आयात के नाम पर मादक पदार्थ (हेरोइन) की बड़ी खेप भेजने का मामला है।

एनआईए ने शीर्ष अदालत में दाखिल हलफनामे में कहा, “उक्त अर्ध-प्रसंस्कृत टैल्क पत्थर हेरोइन से भरे पत्थर थे, जिन्हें नयी प्रोपराइटर फर्म और शेल कंपनियों के नाम पर भारत में आयात किया गया था। इन कंपनियों ने हेरोइन से भरे इन अर्ध-प्रसंस्कृत टैल्क पत्थरों को एक व्यापारिक वस्तु के रूप में दिखाया था।”

आतंकवाद निरोधी एजेंसी ने कहा कि वैध आयात माध्यमों से भारत में हेरोइन से भरे इन अर्ध-प्रसंस्कृत टैल्क पत्थरों के आयात में सफल होने के बाद अफगानिस्तान के एक मादक पदार्थ तस्कर ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और ईरान के एक बिचौलिये की मदद से उसी प्रक्रिया का सहारा लेकर 2988.21 किलोग्राम हेरोइन की एक बड़ी खेप आयात की, जिसका इस्तेमाल अफगानिस्तान से ईरान के बंदर अब्बास के रास्ते खेप भेजने और भारत में मेसर्स आशी ट्रेडिंग कंपनी नामक आयात कंपनी के नाम पर टैल्क पाउडर के रूप में आयात करने के लिए किया गया था।

एनआईए ने आरोप लगाया, “सभी खेप की बिक्री से अर्जित राशि का इस्तेमाल लश्कर-ए-तैयबा की आतंकवादी गतिविधियों के वित्त पोषण के लिए किया जाना था।”

एजेंसी ने अपराध की गंभीरता, अंतरराष्ट्रीय प्रभाव, भारत विरोधी मंसूबे रखने वाले देशों की खुफिया एजेंसियों की संलिप्तता और जांच में प्रगति का हवाला दिया। उसने कहा कि अदालत ने मामले में कई सह-आरोपियों की जमानत याचिका पहले ही खारिज कर दी है।

एनआईए ने कहा, “जांच से पहले ही सामने आ चुका है कि इस नार्को-आतंकवाद की मुख्य साजिशकर्ता पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और पाकिस्तान समर्थित प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा हैं। ऐसे में याचिकाकर्ता को मौजूदा मामले में जमानत नहीं दी जानी चाहिए, ताकि जघन्य प्रकृति की इस अंतरराष्ट्रीय साजिश से जुड़े मुकदमे को बाधित होने और घोर अन्याय होने से रोका जा सके।”

तलवार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ए सुंदरम ने दलील दी कि उनके मुवक्किल पर तस्करी का आरोप लगाने के लिए कोई सबूत नहीं है और उसने केवल अफगानिस्तान से भारत में टैल्क पत्थर का आयात किया था।

उन्होंने कहा कि किसी भी गवाह ने तलवार के साजिश में शामिल होने की बात नहीं कही है और उच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत न देकर गलती की है।

गुजरात में 12 सितंबर 2021 को अफगानिस्तान से ईरान के रास्ते मुंद्रा बंदरगाह पर कुछ कंटेनर पहुंचे थे, जिनमें अर्ध-प्रसंस्कृत टैल्क पत्थरों से भरे बैग रखे हुए थे।

राजस्व खुफिया निदेशालय ने खुफिया जानकारी के आधार पर 13 सितंबर 2021 को कंटेनर की जांच की और कुछ बैग में हेरोइन पाई। जांच में कंटेनर से 21,000 करोड़ रुपये कीमत की कुल 2988.21 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई।

जांचकर्ताओं ने बाद में पाया कि यह छठी और आखिरी खेप थी, जिसे पकड़ा गया था। इस मामले के सिलसिले में अफगान नागरिकों सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

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