जरुरी जानकारी | सस्ते आयातित तेल से ज्यादातर तेल तिलहन के भाव में नरमी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशों में कमजोर रुख के बीच दिल्ली बाजार में शुक्रवार को ज्यादातर तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट रही। सरसों तेल तिलहन, सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल कीमतें नुकसान के साथ बंद हुई जबकि मूंगफली तेल तिलहन, सोयाबीन तिलहन और बिनौला तेल के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।

नयी दिल्ली, 14 अप्रैल विदेशों में कमजोर रुख के बीच दिल्ली बाजार में शुक्रवार को ज्यादातर तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट रही। सरसों तेल तिलहन, सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल कीमतें नुकसान के साथ बंद हुई जबकि मूंगफली तेल तिलहन, सोयाबीन तिलहन और बिनौला तेल के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।

मलेशिया एक्सचेंज में कोई घट बढ़ नहीं थी जबकि शिकागो एक्सचेंज में आधा प्रतिशत की गिरावट है।

बाजार सूत्रों ने कहा कि देश भर में सस्ते सूरजमुखी और सोयाबीन तेल का इतनी अधिक मात्रा में आयात हुआ है कि उसके आगे पामोलीन तेल टिक नहीं पा रहा है। सूरजमुखी और सोयाबीन तेल पामोलीन से 3-4 रुपये नीचे चले गये क्योंकि पामोलीन प्रीमियम पर नहीं बिकता जबकि सूरजमुखी और सोयाबीन तेल सस्ते आयात के बावजूद प्रीमियम पर बेचे जा रहे हैं। ये दोनों ही तेल उच्च आयवर्ग के बीच खाये जाते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार को इस बारे में पुनर्विचार करना होगा कि खाद्यतेलों के शुल्कमुक्त आयात की छूट क्या इसलिए दी थी कि देश के सरसों की बंपर फसल और सूरजमुखी फसल बाजार में न खपने पाये ?

सूत्रों ने कहा कि अगर इस छूट का मकसद उपभोक्ताओं को लगभग पांच रुपये लीटर सस्ता तेल उपलब्ध कराना है तो वह मनमाना अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) तय किये जाने और अधिक प्रीमियम राशि के साथ बिकने से उपभोक्ताओं को सस्ता नहीं मिल रहा है।

दूसरी तरफ किसान परेशान हैं कि उनकी फसल मंडियों में बिक नहीं रही या बिक भी रही है तो न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम दाम पर। तेल उद्योग परेशान है कि उसे पेराई में नुकसान है और पेराई के बाद उनका देशी तेल बेपड़ता होने (अधिक लागत होने) से सस्ते आयातित तेलों से भरे बाजार में खप नहीं रहा। तेल उद्योग द्वारा बैंकों से लिया कर्ज डूबने का खतरा है। सरकार को इस बेकाबू होती हालात को संभालने की पहल करनी होगी।

सूत्रों ने कहा कि देश को तेल तिलहन मामले में आत्मनिर्भर बनाना ही हमें विदेशों पर निर्भरता खत्म करने और भारी मात्रा में विदेशीमुद्रा को बचाने में मदद कर सकता है।

शुक्रवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 5,115-5,210 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 6,790-6,850 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 16,660 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,535-2,800 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 10,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,600-1,670 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,600-1,720 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,800 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,700 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 9,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,550 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,400 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,100 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 9,200 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 5,375-5,425 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 5,125-5,225 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\