देश की खबरें | मोदी सरकार ने ‘सहकारी संघवाद के नए युग’ की शुरुआत की: अधिकारी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुए मुख्य सचिवों के दूसरे राष्ट्रीय सम्मेलन के साथ ही आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को कहा कि सरकार ने नीति निर्माण और क्रियान्वयन की प्रक्रिया को अधिक सहयोगात्मक और परामर्शी बनाकर ‘‘सहकारी संघवाद के नए युग’’ की शुरुआत की है।

नयी दिल्ली, छह जनवरी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुए मुख्य सचिवों के दूसरे राष्ट्रीय सम्मेलन के साथ ही आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को कहा कि सरकार ने नीति निर्माण और क्रियान्वयन की प्रक्रिया को अधिक सहयोगात्मक और परामर्शी बनाकर ‘‘सहकारी संघवाद के नए युग’’ की शुरुआत की है।

उन्होंने कहा कि मुख्य सचिवों के सम्मेलन का उद्देश्य समन्वय व राज्यों के साथ साझेदारी में तेज और निरंतर आर्थिक विकास करना है क्योंकि प्रधानमंत्री का मानना है कि यह नए भारत के विकास और प्रगति के लिए एक आवश्यक स्तंभ है।

उनके मुताबिक, इस दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए मोदी ने इस सम्मेलन की अवधारणा तैयार की थी और पिछले साल धर्मशाला में पहली बार इसका आयोजन किया गया।

अधिकारियों ने इस कड़ी में कई कार्यक्रमों और उदाहरणों का उल्लेख किया, जिनमें प्रधानमंत्री ने सहकारी संघवाद को मजबूत करने की कोशिश की।

केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर, जनवरी 2018 में मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘‘आकांक्षी जिला कार्यक्रम’’ में काम कर रहे हैं ताकि सरकारी कार्यक्रमों और योजनाओं के माध्यम से देश के सबसे पिछड़े जिलों में तेजी से विकास किया जा सके।

सूत्रों ने कहा कि मोदी सरकार ने कर संसाधनों के विभाज्य पूल में राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए भी काम किया है।

उन्होंने कहा कि करीब 13 साल तक मुख्यमंत्री रहे मोदी जानते हैं कि राज्यों के विकास की कुंजी पर्याप्त संसाधनों की उपलब्धता है। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, उनकी सरकार ने करों के विभाज्य पूल में राज्यों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत करने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि इससे राज्यों को अपनी जरूरतों के अनुसार कार्यक्रम तैयार करने और उनके कार्यान्वयन के लिए अधिक संसाधन मिले हैं।

उन्होंने बताया कि एक अन्य उदाहरण माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद है, जहां केंद्र और राज्य दोनों निर्णय लेने में भागीदार हैं। उन्होंने कहा कि परिषद का कामकाज राजकोषीय संघवाद का एक उदाहरण है जिसमें आम सहमति से निर्णय लिए जाते हैं।

उनके मुताबिक, मोदी ने केंद्र और राज्यों को शामिल करते हुए ‘‘प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन’’ (प्रगति) के लिए सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) आधारित मल्टी-मॉडल प्लेटफॉर्म प्रगति की अनूठी अवधारणा भी शुरू की है।

सूत्रों ने कहा कि इस अनूठी पहल से केंद्र सरकार (सचिव), राज्य सरकार (मुख्य सचिव) और अन्य अधिकारी प्रधानमंत्री के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं और सभी विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों और योजनाओं के समयसीमा में क्रियान्वयन के लिए एक साथ प्रयासरत हैं।

सूत्रों ने कहा कि यह पूरी कवायद सहकारी संघवाद की भावना को बढ़ावा देने के लिए तैयार की गई है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री वार्षिक डीजीपी सम्मेलनों में भाग लेते थे, लेकिन पिछले वर्षों से यह ‘‘नियमित’’ हो गया है और इसमें उनकी ज्यादातर ‘‘प्रतीकात्मक’’ उपस्थिति रहती है। हालांकि, मोदी सम्मेलन के सभी सत्रों में भाग लेने का प्रयास करते हैं और शीर्ष पुलिस अधिकारियों के साथ स्वतंत्र और अनौपचारिक चर्चा को प्रोत्साहित करते हैं।

उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया है कि ये बैठकें दिल्ली से बाहर, राज्यों में आयोजित की जाएं।

सूत्रों ने कहा कि इससे राज्यों के पुलिस प्रमुखों के लिए अनुकूल माहौल विकसित करने में मदद मिली है ताकि वे सर्वोत्तम प्रथाओं से सीख सकें और कानून और व्यवस्था से जुडी प्रमुख चुनौतियों का समाधान खोजने की दिशा में काम कर सकें।

मोदी ने अक्टूबर 2022 में राज्यों के गृह मंत्रियों के ‘‘चिंतन शिविर’’ को भी संबोधित किया था और सितंबर में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से गुजरात में पर्यावरण मंत्रियों के राष्ट्रीय सम्मेलन में बात की थी।

उन्होंने सितंबर में अहमदाबाद में ‘‘केंद्र-राज्य विज्ञान सम्मेलन’’ का उद्घाटन किया, जो अपनी तरह का पहला सम्मेलन था। हाल ही में वह परिषद के स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर पूर्वोत्तर परिषद की बैठक में भाग लेने के लिए शिलॉंग गए थे।

सूत्रों ने कहा कि मोदी सरकार देश में सहकारी संघवाद को मजबूत करने और बढ़ावा देने के लिए नियमित रूप से क्षेत्रीय परिषदों की बैठकें कर रही है। उन्होंने अगस्त में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के श्रम मंत्रियों के राष्ट्रीय सम्मेलन को भी संबोधित किया था।

हाल ही में मोदी ने राष्ट्रीय गंगा परिषद की दूसरी बैठक की अध्यक्षता की और पानी पर पहले अखिल भारतीय वार्षिक राज्य मंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित किया।

सूत्रों ने बताया कि भारत अब जी-20 देशों के समूह की अध्यक्षता कर रहा है और साल भर इसकी बैठकों की मेजबानी करने के लिए तैयार है, ऐसे में प्रधानमंत्री ने इससे संबंधित पहलुओं पर चर्चा करने के लिए नौ दिसंबर को राज्यों के राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों की बैठक की अध्यक्षता की।

उन्होंने कहा कि ये बैठकें वैश्विक मंच पर विभिन्न संस्कृतियों, रीति-रिवाजों और खान-पान को प्रदर्शित करने के लिए पूरे देश में आयोजित की जाएंगी, जो इस प्रयास में सभी राज्यों को साथ लेने पर उनके जोर को उजागर करती हैं।

मोदी ने बजट प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए विभिन्न मंत्रालयों और हितधारकों के साथ बजट के बाद वेबिनार बैठकों का भी ‘बीड़ा’ उठाया है। उन्होंने कहा कि इन वेबिनार में राज्य स्तर के अधिकारियों की भागीदारी भी देखी जाती है ताकि राज्य प्रभावी तरीके से बजट संबंधी पहलों का लाभ उठा सकें।

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