देश की खबरें | मोदी ने लोगों से बेटियों की शिक्षा, कौशल विकास पर ध्यान देने का संकल्प लेने को कहा

वाराणसी, 14 दिसंबर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को लोगों से बेटियों की शिक्षा और कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करने और गंगा सहित सभी जल स्रोतों को साफ रखने का संकल्प लेने का आग्रह किया।

सद्गुरु सदाफलदेव विहंगम योग संस्थान की 98वीं वर्षगांठ के अवसर पर यहां स्वरवेद महामंदिर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश आजादी के 75 साल पूरे कर रहा है, “सुराज” उतना ही महत्वपूर्ण है जितना “स्वराज”।

मोदी ने अपनी टिप्पणी में कहा कि शून्य बजट प्राकृतिक खेती को जन आंदोलन बनाया जाना चाहिए और लोगों को इसके फायदों से अवगत कराया जाना चाहिए।

शून्य बजट प्राकृतिक खेती पारंपरिक क्षेत्र-आधारित प्रौद्योगिकियों पर भरोसा करके कृषि लागत को कम करती है और इससे मिट्टी की उर्वरता में सुधार होता है।

मोदी ने अपनी टिप्पणी में कहा कि वाराणसी में 2014-15 की तुलना में 2019-20 में पर्यटकों की आमद दोगुनी हो गई है, उन्होंने कोविड-19 महामारी के बावजूद इस वृद्धि का श्रेय “बनारस की इच्छाशक्ति” को दिया।

उन्होंने कहा कि 2019-20 में, कोरोना के कालखंड में अकेले बाबतपुर हवाईअड्डे से ही 30 लाख से ज्यादा यात्रियों का आना-जाना हुआ है।

सद्गुरु द्वारा दिए गए ‘स्वदेशी’ के मंत्र का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उसी भावना के साथ देश ने ‘आत्मनिर्भर भारत मिशन’ शुरू किया है।

उन्होंने कहा, “आज देश के स्थानीय व्यापार-रोजगार को, उत्पादों को ताकत दी जा रही है, ‘लोकल को ग्लोबल’ बनाया जा रहा है।”

‘सबका प्रयास’ की भावना से आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए मोदी ने सभी से अनुरोध किया कि वे कुछ संकल्प लें जो सद्गुरु के संकल्पों को फलीभूत करने वाले और देश की अकांक्षाओं को शामिल करने वाले हों।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एक संकल्प बेटियों की शिक्षा और उनके कौशल विकास पर ध्यान देना हो सकता है।

उन्होंने कहा, “अपने परिवार के साथ-साथ जो लोग समाज में ज़िम्मेदारी उठा सकते हैं, वो एक दो गरीब बेटियों के कौशल विकास की भी ज़िम्मेदारी उठाएं।”

उन्होंने कहा कि एक अन्य संकल्प हो सकता है पानी बचाने के लिए। हमें “अपनी नदियों को, गंगा जी को, सभी जलस्रोतों को स्वच्छ रखना है। ”

अपने निर्वाचन क्षेत्र के दौरे के दूसरे दिन लोगों की भारी भीड़ को संबोधित करते हुए मोदी ने हाल के दिनों में यहां हुए विकास को भी रेखांकित किया और कहा कि बनारस जैसे शहरों ने मुश्किल से मुश्किल समय में भी भारत की पहचान के, कला के, उद्यमिता के बीजों को सहेजकर रखा है।

उन्होंने कहा, “जहां बीज होता है, वृक्ष वहीं से विस्तार लेना शुरू करता है। और इसीलिए, आज जब हम बनारस के विकास की बात करते हैं, तो इससे पूरे भारत के विकास का रोडमैप भी बन जाता है।”

मोदी ने बीती देर रात शहर में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं का निरीक्षण भी किया।

मोदी ने कहा, “कल रात 12-12.30 बजे के बाद जैसे ही मुझे अवसर मिला, मैं फिर निकल पड़ा था अपनी काशी में जो काम चल रहे हैं, जो काम किया गया है, उनको देखने के लिए। गौदोलिया में जो सौंदर्यीकरण का काम हुआ है, वो वाकई देखने योग्य है। वहां कितने ही लोगों से मेरी बातचीत हुई। मैंने मडुवाडीह में बनारस रेलवे स्टेशन भी देखा। इस स्टेशन का भी अब कायाकल्प हो चुका है।”

उन्होंने कहा, “पुरातन को समेटे हुए नवीनता को धारण कर, बनारस देश को नई दिशा दे रहा है।”

मोदी ने कहा कि वह जब दिल्ली में भी रहते हैं तो प्रयास रहता है कि बनारस में हो रहे विकास कार्यों पर नजर रख सकें। उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने ‘विश्वनाथ धाम’ को समर्पित किए जाने को याद करते हुए कहा कि काशी की उर्जा अक्षुण्ण होने के साथ ही नित नया विस्तार लेती रहती है।

उन्होंने लोगों को गीता जयंती की भी बधाई दी।

सद्गुरु सदाफलदेव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मोदी ने कहा, “मैं उनकी आध्यात्मिक उपस्थिति को प्रणाम करता हूं। मैं श्री स्वतंत्रदेव जी महाराज और श्री विज्ञानदेव जी महाराज का भी आभार व्यक्त करता हूँ जो इस परंपरा को जीवंत बनाए हुए हैं।”

उन्होंने कहा, “हमारा देश इतना अद्भुत है कि, यहां जब भी समय विपरीत होता है, कोई न कोई संत-विभूति, समय की धारा को मोड़ने के लिए अवतरित हो जाती है। ये भारत ही है जिसकी आज़ादी के सबसे बड़े नायक को दुनिया महात्मा बुलाती है।”

मोदी ने सोमवार को प्राचीन मंदिर में पूजा के बाद ‘काशी विश्वनाथ धाम’ के पहले चरण का लोकार्पण किया था।

अपने दौरे के दौरान मोदी ने भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उप मुख्यमंत्रियों के साथ एक बैठक में भी हिस्सा लिया।

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