आइजोल, पांच मई मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरामथांगा ने शुक्रवार को कहा कि उनकी सरकार हिंसा प्रभावित मणिपुर में फंसे अपने राज्य के लोगों को निकालने के लिए कदम उठा रही है।
जोरामथांगा ने मिजोरम में रहने वाले मणिपुर के लोगों की सुरक्षा का भी आश्वासन दिया। उन्होंने केंद्र और मणिपुर सरकार से पूर्वोत्तर राज्य में हिंसा को समाप्त करने के लिए और प्रयास करने का आग्रह किया।
मिजोरम के मुख्यमंत्री ने एक बयान में कहा, ‘‘पड़ोसी राज्य में फंसे मिजोरम के निवासियों, विशेषकर छात्रों और कर्मचारियों को निकालने के लिए निजी उड़ानों का प्रबंध करने के प्रयास जारी हैं।’’
जोरामथांगा ने कहा कि उन्होंने मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह से आग्रह किया है कि वे राजधानी इंफाल में फंसे आदिवासी लोगों की राज्य के चुराचंदपुर और अन्य जिलों में उनके पैतृक गांवों में सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करें।
जोरामथांगा ने कहा कि सिंह ने आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
इस बीच, मिजोरम के गृह विभाग ने राज्य में रहने वाले मेइती समुदाय के लोगों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है।
मेइती मणिपुर के पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाला बहुसंख्यक समुदाय है। मेइती समुदाय द्वारा उसे अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में ‘ऑल ट्राइबल स्टूडेंट यूनियन मणिपुर’ (एटीएसयूएम) की ओर से बुधवार को आयोजित ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के दौरान चुराचंदपुर जिले के तोरबंग क्षेत्र में हिंसा भड़क गई थी।
नगा और कुकी सहित अन्य आदिवासी समुदायों की ओर से इस मार्च का आयोजन मणिपुर उच्च न्यायालय द्वारा पिछले महीने राज्य सरकार को मेइती समुदाय की एसटी दर्जे की मांग पर चार सप्ताह के भीतर केंद्र को एक सिफारिश भेजने का निर्देश देने के बाद किया गया था।
पुलिस के अनुसार, तोरबंग में मार्च के दौरान हथियार लिये लोगों की भीड़ ने कथित तौर पर मेइती समुदाय के सदस्यों पर हमला किया। मेइती समुदाय के लोगों ने भी जवाबी हमले किए, जिससे पूरे राज्य में हिंसा फैल गई।
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