जरुरी जानकारी | मारीशस, भारत व्यापार समझौते के पूर्ण इस्तेमाल से तेजी से बढ़ सकता है व्यापार: अलान गनू
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. भारत और मारीशस के बीच अमल में आये मुक्त व्यापार समझौते का पूरी तरह इस्तेमाल होने पर दोनों देशों के बीच व्यापार में काफी वृद्धि हो सकती है। मारीशस के विदेश मामलों, क्षेत्रीय एकीकरण और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री अलान गनू ने मंगलवार को यह कहा।
नयी दिल्ली, 15 जून भारत और मारीशस के बीच अमल में आये मुक्त व्यापार समझौते का पूरी तरह इस्तेमाल होने पर दोनों देशों के बीच व्यापार में काफी वृद्धि हो सकती है। मारीशस के विदेश मामलों, क्षेत्रीय एकीकरण और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री अलान गनू ने मंगलवार को यह कहा।
भारत और मारीशस के बीच वृहद आर्थिक सहयोग एवं भागीदारी समझौता (सीईसीपीए) 22 फरवरी को किया गया। यह समझौता एक अप्रैल से अमल में आ गया है। इस समझौते में भारत की ओर से 310 निर्यात वस्तुओं को शामिल किया गया है। इनमें खाद्य एवं पेय, कृषि उत्पादों, कपड़ा और कपड़ा वस्तुओं, मूल धातु, इलेक्ट्रिकल्स और इलेक्ट्रानिक सामान, प्लास्टिक और रसायन और लकड़ी आदि शामिल हैं।
इसके दूसरी तरफ मारीशस को उसके 615 उत्पादों के लिये भारत में तरजीही बाजार पहुंच का लाभ मिलेगा। इनमें शीतित मछली, खास तरह की चीनी, बिस्कुट, ताजे फल एवं जूस, खनिज जल, बीयर, अल्कोहलिक पेय, साबुन, बैग, चिकित्सा एवं सर्जिकल उपकरण और परिधान शामिल हैं।
गनू ने कहा कि दोनों देशों के बीच के व्यापार आंकड़े उनकी मौजूदा संभावनाओं से काफी कम है। एक अप्रैल से अमल में आये सीईसीपीए की संभावनाओं का यदि पूरी तरह से इस्तेमाल हुआ तो यह आंकड़ा तेजी से बढ़ सकता है।
गनू यहां पीएचडी वाणिज्य एवं उद्योग मंडल में आयोजित मारीशस में भारतीय उद्योगों के लिये वैश्विक व्यापार और निवेश अवसर पर आयोजित परिचर्चा सत्र में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों और आयातकों के लिये फायदेमंद है। वर्तमान में मारीशस में शिक्षा, आईसीटी और वित्तीय सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में करीब 64 भारतीय कंपनियां परिचालन में हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय व्यवसायी मारीशस को अफ्रीकी बाजारों में अपनी पहुंच बनाने के लिये प्रवेश द्वार के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं।
भारत और मारीशस के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2019- 20 में 69 करोड़ डालर का रहा जबकि इससे पिछले साल यह 1.23 अरब डालर रहा था।
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