ताजा खबरें | लोकसभा ने अनुसंधान राष्ट्रीय शोध प्रतिष्ठान विधेयक को मंजूरी दी

नयी दिल्ली, सात अगस्त लोकसभा ने सोमवार को ‘अनुसंधान राष्ट्रीय शोध प्रतिष्ठान विधेयक, 2023’ को पारित किया जिसमें देशभर के विश्वविद्यालयों में अनुसंधान को वित्त पोषित करने के लिए एक राष्ट्रीय प्रतिष्ठान स्थापित करने का प्रावधान किया गया है।

सदन में संक्षिप्त चर्चा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह के जवाब के बाद इस विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दी। चर्चा के दौरान कई विपक्षी दलों के सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे।

सिंह ने निचले सदन में संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि यह विधेयक मानव संसाधन और वित्तपोषण का लोकतंत्रीकरण करने के लिए है।

उन्होंने कहा कि यह संस्था ने राज्यों के स्तर पर विश्वविद्यालयों के बीच स्पर्धा को प्रोत्साहित करेगा ताकि उन्हें निधि प्राप्त हो सके । इस स्पर्धा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और भारतीय प्रबंध संस्था (आईआईएम) शामिल नहीं होंगे।

विधेयक को चर्चा और पारित करने के लिए रखते हुए सिंह ने कहा कि आज यहां इतिहास बन रहा है क्योंकि 75 साल में ऐसा विधेयक कभी नहीं आया।

उन्होंने कहा, ‘‘ कुछ देशों ने अनुसंधान राष्ट्रीय शोध प्रतिष्ठान जैसे संस्थान गठित किए हैं। हम उन देशों से एक कदम आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं।’’

सिंह का कहना था, ‘‘ हम इस विधेयक के माध्यम से राज्यों का सशक्तीकरण कर रहे हैं । वे अपने विश्वविद्यालयों को वित्तपोषण नहीं कर पा रहे थे, ऐसे में हम उन्हें मदद दे रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि अब समय आ यहा है कि सार्वजनिक निजी भागीदारी की ओर बढ़ा जाए। यह संस्था उद्योग जगत को अकादमिक व्यवस्था के साथ जोड़ेगी।

सिंह के अनुसार, इसके तहत स्थापित होने वाले प्रतिष्ठान के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होंगे तथा शिक्षा मंत्री, विज्ञान मंत्री और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार इसमें शामिल होंगे। इसमें उद्योग जगत से पांच सदस्य हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि इस संस्था के लिए कुल 50 हजार करोड़ रुपये का बजट पांच साल के लिए रखा गया है। इसमें 36 हजार करोड़ रुपये उद्योग जगत के माध्यम और अन्य साधनों से एकत्र किए जाएंगे।

विधेयक पर संक्षिप्त चर्चा की शुरुआत करते हुए भारतीय जनता पार्टी के जगदंबिका पाल ने कहा कि इस विधेयक से भविष्य की चुनौतियों से निपटा जा सकेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह संस्था बनने के बाद दुनिया शोध के मामले में भारत पर निर्भर होगी, भारत दूसरों पर निर्भर नहीं रहेगा।’’

वहीं, वाईएसआर कांग्रेस के टी. रंगैया ने विधेयक का समर्थन करते हुए कि यह प्रतिष्ठान बनने से अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में भारत को ताकत मिलेगी।

भाजपा के जयंत सिन्हा ने कहा कि यह विधेयक मानव विकास, विश्वविद्यालयों के विकास और भविष्य के लिए बहुत जरूरी है।

बहुजन समाज पार्टी के मलूक नागर, शिरोमणि अकाली दल (एम) के सिमरनजीत सिंह मान ने भी चर्चा में भाग लिया।

जितेंद्र सिंह ने ‘अनुसंधान राष्ट्रीय शोध प्रतिष्ठान विधेयक, 2023’ गत चार अगस्त को सदन में पेश किया था।

विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि यह विधेयक अनुसंधान और विकास, वैज्ञानिक खोजों, नई प्रौद्योगिकियों और अभिनव अनुप्रयोगों की आधारशिला है। प्रतिस्पर्धा, वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की सफलता और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के विभिन्न आयामों में चुनौतियों और अवसरों का समाधान करने के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इसमें कहा गया है कि विज्ञान के सभी क्षेत्रों में एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र का विकास आवश्यक है। इसमें गणितीय विज्ञान, इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी, पर्यावरण एवं पृथ्वी विज्ञान, स्वास्थ्य और कृषि के साथ ही मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान के वैज्ञानिक और तकनीकी आयाम सम्मिलित हैं।

इसके अनुसार, विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड अधिनियम 2008 में अब तक ऐसे अनुसंधान में लगे व्यक्तियों को वित्तीय सहायता के माध्यम से विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए अच्छा अवसर प्रदान किया गया। फिर भी विज्ञान अधिनियम के माध्यम से गठित विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड का पैमाना और क्षेत्र सीमित रहा।

विधेयक के उद्देश्यों में कहा गया है कि देश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र में निर्णायक बदलाव लाने में सक्षम अनुसंधान और नवाचार के लिए अधिक समग्र दृष्टिकोण के जरिये एकीकृत योजना और समन्वय की आवश्यकता है। हमारे देश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रशिक्षित मानव संसाधनों का एक विशाल समूह है जिनमें से कई लोग भारत के बाहर के विश्वविद्यालय और संस्थाओं में वैज्ञानिक अनुसंधान के अवसर तलाश सकते हैं।

इसका मकसद वित्तीय रूप से व्यावहारिक अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र सुनिश्चित करने के लिए निजी क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों का दोहन करना भी है। प्रस्तावित नए विधान का उद्देश्य वैज्ञानिक खोज के लिए भारत के राष्ट्रीय अनुसंधान और ज्ञान उद्यमिता और नवाचार क्षमता को बढ़ाना है।

इसमें कहा गया है कि ‘अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान विधेयक 2023’ का मकसद एक बहुत ही जीवंत एवं विश्वस्तरीय सक्षम वैज्ञानिक पारिस्थितिक तंत्र का सृजन करना है।

विधेयक के उपबंध 3 और 4 में अनुसंधान राष्ट्रीय शोध प्रतिष्ठान की स्थापना का उपबंध किया गया है।

विधेयक में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले प्रतिष्ठान के प्रशासनिक बोर्ड की संरचना का भी उल्लेख किया गया है।

इसमें वित्तीय कोष के गठन की बात भी कही गई है जिसमें निजी क्षेत्र का भी योगदान होगा।

राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान के संचालक मंडल में प्रतिष्ठित शोधार्थी और पेशेवर शामिल होने की बात कही गई है।

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