ताजा खबरें | तटीय जलकृषि प्राधिकरण विधेयक को लोकसभा की मंजूरी मिली
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. लोकसभा ने सोमवार को ‘तटीय जलकृषि प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2023' को मंजूरी दी। इसमें तटीय जल कृषि कानून के दायरे का विस्तार करने, कारावास के प्रावधानों को हटाने तथा पर्यावरण संरक्षण के सिद्धांतों से समझौता किये बिना नियामक अनुपालन शर्तों को आसान करने का प्रावधान किया गया है।
नयी दिल्ली, सात अगस्त लोकसभा ने सोमवार को ‘तटीय जलकृषि प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2023' को मंजूरी दी। इसमें तटीय जल कृषि कानून के दायरे का विस्तार करने, कारावास के प्रावधानों को हटाने तथा पर्यावरण संरक्षण के सिद्धांतों से समझौता किये बिना नियामक अनुपालन शर्तों को आसान करने का प्रावधान किया गया है।
सदन में इस विधेयक पर चर्चा और केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला के जवाब के बाद इसे ध्वनिमत से मंजूरी दी गई।
चर्चा का जवाब देते हुए रुपाला ने कहा कि स्थायी समिति ने इस विधेयक पर गहन चर्चा की, बहुत सारे लोगों से बात की और 56 संशोधनों का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि समिति द्वारा सुझाए गए 56 संशोधनों में 45 को स्वीकार कर लिया गया।
मंत्री के अनुसार, आजादी से लेकर 2014 तक 3,680 करोड़ रुपये का खर्च मछुआरों पर किया गया, वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद इसके लिए अलग विभाग बनाया गया और योजनाएं शुरू की गईं जिन पर कुल 20 हजार करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं।
रुपाला ने कहा कि विधेयक को पारित कर यह संदेश दिया जाए कि करोड़ो मछुआरों के साथ पूरी संसद खड़ी है।
चर्चा में भाग लेते हुए भारतीय जनता पार्टी के पी पी चौधरी ने कहा कि इस विधेयक से तटीय राज्यों को बहुत फायदा होगा।
भाजपा के ही राजेशभाई चूडास्मा, मनोज तिवारी और कुछ अन्य सदस्यों ने विधेयक पर चर्चा में भाग लिया।
मंत्री ने यह विधेयक पांच अप्रैल, 2023 को लोकसभा में पेश किया था जिसके बाद इसे संसद की स्थायी समिति के पास भेज दिया गया था।
इस विधेयक का मकसद भारत में तटीय जलकृषि की क्षमता का उचित दोहन करना और सस्ते एवं सुरक्षित प्रोटीन के सतत उत्पादन को बढ़ावा देना है।
साथ ही, इसका उद्देश्य 2005 के अधिनियम में संशोधन करके इसके दायरे को वर्तमान तटीय जलकृषि फार्म से परे विस्तारित करना है। इसके माध्यम से जलकृषि के सभी कार्यक्षेत्रों और गतिविधियों को इसके दायरे में लाया जा सकेगा, जिससे इस क्षेत्र का सतत विकास सुनिश्चित हो सकेगा।
इस विधेयक में क्षेत्रीय जरूरतों और मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर नियमों में नवीनीकरण करने का प्रस्ताव किया गया है ताकि तटीय जलकृषि फार्म और अन्य गतिविधियों के पंजीकरण में आने वाली कठिनाइयों को कम किया जा सके।
विधेयक में वर्तमान कानून की एक धारा में संशोधन करके कारावास के प्रावधानों को हटाने का प्रस्ताव किया गया है। हालांकि, कारावास के बदले उपयुक्त जुर्माना एवं अन्य दंड का संयोजन प्रस्तावित है।
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