लॉकडाउन: कुछ राज्यों में ढील, कुछ में कोई राहत नहीं, संक्रमण के मामले दोगुने होने की दर कम हुई

इस बीच कुछ राज्यों ने अर्थव्यवस्था को हो रहे नुकसान को थामने के लिए लॉकडाउन की कुछ पाबंदियों में ढील देने की घोषणा की है, वहीं तमिलनाडु, कर्नाटक ने दिल्ली की तरह तीन मई तक कोई ढील नहीं देने का फैसला लेकर कड़े प्रतिबंध जारी रखने को प्राथमिकता दी है।

जमात

नयी दिल्ली, 20 अप्रैल कोविड-19 से निपटने की दिशा में राहत भरी खबर देते हुए सरकार ने सोमवार को कहा कि देश में अब संक्रमण के मामले दोगुने होने की दर धीमी होकर 7.5 दिन हो गयी है तथा एक पखवाड़े में 59 जिलों में कोरोना वायरस का एक भी मामला सामने नहीं आया है।

इस बीच कुछ राज्यों ने अर्थव्यवस्था को हो रहे नुकसान को थामने के लिए लॉकडाउन की कुछ पाबंदियों में ढील देने की घोषणा की है, वहीं तमिलनाडु, कर्नाटक ने दिल्ली की तरह तीन मई तक कोई ढील नहीं देने का फैसला लेकर कड़े प्रतिबंध जारी रखने को प्राथमिकता दी है।

तेलंगाना राज्य ने लॉकडाउन को सात मई तक बढ़ाने का सुझाव दिया है।

पंजाब ने पहले तीन मई तक किसी भी तरह की ढील देने से इनकार किया था लेकिन अब कहा है कि उच्च जोखिम वाले नियंत्रण क्षेत्रों के अतिरिक्त कुछ स्थानों पर कुछ औद्योगिक गतिविधियां प्रारंभ हो सकती हैं।

बंद में पहले चरण की राहतें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, केरल और गोवा समेत कुछ राज्यों में चुनिंदा स्थानों पर दी गयी हैं।

कई राज्यों में संक्रमण के मामलों में आज भी इजाफा देखा गया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार रविवार और सोमवार के बीच देश में कोरोना वायरस से संक्रमण के 1553 नये मामले सामने आये, वहीं 15 प्रतिशत रोगी सही हो चुके हैं।

मंत्रालय ने शाम पांच बजे के आंकड़ों में बताया कि देश में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 17,656 पर पहुंच गया है और अब तक 559 मरीजों की मौत हो गयी है।

हालांकि पीटीआई की अनेक राज्यों से संकलित आंकड़ों से बनाई गयी तालिका के अनुसार शाम 6.30 बजे तक संक्रमण के 17,744 मामले आ चुके हैं जिनमें 2,859 रोगी सही हो गए हैं और 584 की मृत्यु हो चुकी है।

अकेले महाराष्ट्र में 4600 मामले हो गए हैं, वहीं दिल्ली में संक्रमण के मामलों की संख्या 2000 को पार कर गयी है। गुजरात में कोविड-19 के मामलों की संख्या 1800 से ऊपर है, वहीं तमिलनाडु और राजस्थान में यह आंकड़ा 1500 से आगे निकल गया है। मध्य प्रदेश में अब तक 1400 से अधिक मरीज इस महामारी की चपेट में आ चुके हैं।

राज्यों के प्राधिकारों द्वारा राहतों की घोषणा के बावजूद उद्योगों के प्रतिनिधियों ने कहा कि अधिकतर कंपनियों ने लॉकडाउन पूरी तरह समाप्त होने तक इंतजार करने का निर्णय लिया है क्योंकि वस्तुओं और लोगों की आवाजाही पर लगातार पाबंदी से रुकी हुई आर्थिक गतिविधियों को बहाल करने में कठिनाई हो सकती है। बंद के कारण आर्थिक गतिविधियां रुकी होने से अब तक देश में 7-8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।

नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर से प्रतिबंध सरकार द्वारा यह सुनिश्चित करने के बाद ही हटाया जाएगा कि कोविड-19 अब पूरी तरह नियंत्रण में है और इससे हमारे देश और लोगों को कोई खतरा नहीं है।

स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने नियमित संवाददाता सम्मेलन में बताया कि 25 मार्च को लॉकडाउन लागू होने के पहले राष्ट्रीय स्तर पर मरीजों की संख्या 3.4 दिन में दोगुनी हो रही थी लेकिन अब 19 अप्रैल तक के विश्लेषण के आधार पर यह दर 7.5 दिन हो गयी है।

अग्रवाल ने इसे कोरोना वायरस के खिलाफ जारी अभियान के लिये सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि देश के 18 राज्य ऐसे हैं जो मरीजों की संख्या दोगुनी होने के मामले में राष्ट्रीय औसत से काफी आगे निकल गये हैं।

उन्होंने कहा कि 23 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 59 जिलों में पिछले 14 दिन में संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया है।

अग्रवाल ने कहा कि गोवा पहला राज्य है जहां अब एक भी संक्रमित मरीज नहीं है। उन्होंने कहा कि गोवा में सभी संक्रमित मरीजों को इलाज के बाद स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी है।

केरल ने लॉकडाउन के दौरान कुछ ढील देने की घोषणा की है लेकिन केंद्र की आपत्ति के बाद इनमें से कुछ को वापस ले लिया है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केरल सरकार को पत्र लिखा है और उसके द्वारा जारी निर्देशों को लेकर चिंता प्रकट की है।

केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने रविवार को केरल के मुख्य सचिव टॉम जोस को भेजे पत्र में लॉकडाउन के कार्यान्वयन के लिए जारी समेकित संशोधित दिशानिर्देशों की ओर उनका ध्यान आकृष्ट किया।

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