लॉकडाउन: अदालत ने साढ़े चार साल की बच्ची के पिता को वीडियो कॉल से बात करने की अनुमति दी
न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति संजीव नरूला की पीठ को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये की गई सुनवाई में बताया गया कि बच्ची पहले अपने पिता से बात नहीं करना चाहती थी लेकिन आठ मई को हुई पिछली सुनवाई के बाद उसने वीडियो कॉल के जरिये अपने पिता से बात की।
नयी दिल्ली, 12 मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को, अपनी मां की देखरेख में रह रही साढ़े चार साल की एक बच्ची को लॉकडाउन समाप्त होने तक वीडियो कॉल के जरिये अपने पिता से संपर्क करने की अनुमति दी है।
न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति संजीव नरूला की पीठ को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये की गई सुनवाई में बताया गया कि बच्ची पहले अपने पिता से बात नहीं करना चाहती थी लेकिन आठ मई को हुई पिछली सुनवाई के बाद उसने वीडियो कॉल के जरिये अपने पिता से बात की।
पिछले साल अप्रैल में अदालत ने आदेश दिया था कि बच्ची के पिता उससे प्रत्येक शनिवार को अपराह्न दो बजे से छह बजे तक मिल सकते हैं और सप्ताह में दो बार बच्ची से बात कर सकते हैं।
बच्ची के पिता ने अदालत से अनुरोध किया कि उसकी पत्नी को इस आदेश के तहत निर्देश दिया जाए ताकि वह अपनी बच्ची से बात कर सके।
पति पत्नी में अदालती विवाद चल रहा है और बच्ची अपनी मां के पास है।
पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, “पिछले आदेश के आलोक में और कोविड-19 महामारी को देखते हुए यह अदालत निर्देश देती है कि जब तक लॉकडाउन समाप्त नहीं हो जाता, तब तक बच्ची की मां को, बच्ची को प्रतिदिन शाम छह बजे से साढ़े छह बजे तक व्हाट्सएप्प, गूगल डुओ या जूम वीडियो की सहायता से बच्ची के पिता से बात करानी होगी।”
अदालत ने यह भी कहा कि लॉकडाउन समाप्त होने के बाद पिछले साल अप्रैल में दिया गया अंतरिम आदेश पूरी तरह लागू और मान्य होगा।
बच्ची की मां ने आठ मई को अदालत को बताया था कि पिछले साल के आदेश का अनुपालन संभव नहीं है क्योंकि बच्ची अपने पिता से बात नहीं करना चाहती।
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