देश की खबरें | कुपवाड़ा दुर्घटना : सैन्यकर्मियों का हिमाचल प्रदेश के पैतृक गांवों में अंतिम संस्कार

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हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश), 16 जनवरी जम्मू कश्मीर में पिछले हफ्ते एक दुर्घटना में जान गंवाने वाले हवलदार अमरीक सिंह और सिपाही अमित शर्मा का हिमाचल प्रदेश में उनके पैतृक गांवों में सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में सोमवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

सिंह और शर्मा की मंगलवार को कुपवाड़ा के माछिल सेक्टर में एक दुर्घटना में मौत हो गई थी। दोनों अपने परिवार में कमाने वाले इकलौते सदस्य थे। गश्त के दौरान वाहन के सड़क से फिसल जाने के कारण हादसा हुआ।

ऊना जिले के गन्नू मंडवाल गांव के हवलदार अमरीक सिंह को सैकड़ों लोगों ने अंतिम सलामी दी। सोमवार को सुबह सिंह के पैतृक गांव की श्मशान भूमि में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। ‘शहीद अमरीक सिंह अमर रहें’ के नारों के बीच सिंह के बेटे अभिनव कुमार और उनके दो चाचा ने उन्हें मुखाग्नि दी।

इस दौरान वहां विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और जिला प्रशासन के अधिकारी भी उपस्थित थे। इससे पहले सिंह के पार्थिव शरीर को चंडीगढ़ से लाकर धार्मिक अनुष्ठान के लिए उनके घर ले जाया गया।

भारतीय सेना के जवानों और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा शव को श्मशान घाट ले जाया गया। चौदहवीं डोगरा रेजीमेंट की एक टुकड़ी ने हवा में गोलियां चलाकर उन्हें सलामी दी। सिंह इसी रेजीमेंट में पदस्थ थे।

हादसे के बाद, शुरुआती चार दिनों तक खराब मौसम के कारण शहीद के पार्थिव शरीर को दुर्घटनास्थल से विमान से नहीं लाया जा सका। छह दिन बाद परिवार के पास शव पहुंचाया गया। ‘‘शहीद अमित शर्मा अमर रहें’’ के नारों के बीच लोगों ने शर्मा को अश्रुपूर्ण विदाई दी। शर्मा के भाई ने हमीरपुर में उनके पैतृक गांव तलसी खुर्द में चिता को मुखाग्नि दी।

विजय कुमार के पुत्र अमित शर्मा (23) अविवाहित थे और 2019 में सेना में 14वीं डोगरा रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। वह कुपवाड़ा के माछिल सेक्टर में तैनात थे।

अंतिम संस्कार के लिए शव को श्मशान घाट भेजे जाने से पहले लोगों ने फूल चढाए और परिवार ने धार्मिक अनुष्ठान किए। दस दिन पहले शर्मा की दादी और छह महीने पहले उनके दादा का निधन हो गया था।

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