देहरादून, पांच मई कोराना वायरस संकट के बीच उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश आर्थिक गिविधियों को पुन: पटरी पर लाने के लिए अब तक प्रदेश में 4483 औद्योगिक इकाइयों को काम शुरू करने की अनुमति दी है जिनमें लगभग 85 हजार कार्मिक कार्य करेंगे।
प्रदेश के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने यहां मीडिया से कहा कि वायरस संक्रमण से बचाव के सभी निर्देशों के अनुसार सावधानियां बरतते हुए बहुत से उद्योगों ने काम भी शुरू कर दिया है।
पर्वतीय जिलों में भी बहुत से उद्योगों को अनुमति दी गई है ।
उन्होंने कहा कि कन्टीन्यूस प्रोसेस वाले उद्योगों के लिए सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों को पूरा करने की शर्तों के साथ 12-12 घंटे की शिफ्ट की अनुमति दी गई है।
सिंह ने बताया कि केंद्र द्वारा मनरेगा में दी गई शिथिलता का लाभ लेते हुए 7311 कार्य प्रारंभ किए गए हैं जिसमें 85231 श्रमिक काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा का काम शुरू हो चुका है और तमाम तरह की आर्थिक गतिविधियां चल रही हैं। उन्होंने कहा कि हम धीरे-धीरे हम सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं।
मुख्य सचिव ने बताया कि किसानों से गेहू खरीद का काम तेजी से चल रहा है और अभी तक 1. 69 हजार क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है । उन्होंने बताया कि किसानों को 48 घंटे के भीतर भुगतान किया जा रहा है और अभी तक 30 करोड़ से अधिक धनराशि का भुगतान समयसीमा में किया जा चुका है। आगे भी यह प्रक्रिया चलती रहेगी।
सिंह ने बताया कि प्रदेश के बाहर रह रहे लगभग 1.30 लाख प्रवासियों ने उत्तराखण्ड लौटने के लिए पंजीकरण कराया है जबकि 5669 लोग अब तक वापस आ चुके हैं । उन्होंने बताया कि दूसरे राज्यों के भी करीब 30 हजार लोगों ने पंजीकरण किया है जो उत्तराखण्ड से अपने राज्य में जाना चाहते हैं।
सिंह ने बताया कि कृषि, बागवानी, डेरी, मत्स्य आदि संबंधित क्षेत्रों में सुधार के लिए कृषि एवं उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में एक मंत्रिमंडलीय उप समिति गठित की गई है।
मुख्य सचिव ने बताया कि उत्तराखण्ड में कोरोना के दोगुने होने की दर 40 दिन है और रिकवरी रेट 65 प्रतिशत है और इस हिसाब से उत्तराखंड देश के अग्रणी राज्यों में हैं । सिंह ने कहा कि राज्य में अभी तक 61 कोराना संक्रमित मामले सामने आया है जिनमें से 39 लोग ठीक होकर घर जा चुके हैं और इस प्रकार वर्तमान में सक्रिय मामलों की संख्या 21 है ।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण की जांच के लिए चार प्रयोगशालाएं हैं जिनकी कुल जांच क्षमता 500 है ।
दीप्ति
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