रांची, पांच मई झारखंड उच्च न्यायालय ने कोरोना वायरस संक्रमण के मामले में दाखिल एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार द्वारा पेश शपथ पत्र को असंतोषजनक करार दिया। अदालत ने एक सप्ताह के भीतर विस्तृत जानकारी उसके समक्ष पेश करने के निर्देश दिये।
न्यायालय ने राज्य में कोरोना वायरस की चल रही जांच पर सरकार से
रिपोर्ट मांगी है।
न्यायालय ने सरकार को यह भी बताने को कहा है कि राज्य में अब
तक कितने लोगों की जांच हुई है। प्रत्येक दिन कितनी जांच हो रही है?
सरकार के शपथ पत्र को असंतोषजनक बताते हुए न्यायालय ने कहा कि इसमें जांच का विवरण नहीं दिया गया है। जब जांच तेजी से होगी तभी इसके परिणाम भी तेजी से आएंगे।
न्यायालय ने राज्य में बाहर से लाए गए मजदूरों को लेकर कार्य योजना बताने का निर्देश भी राज्य सरकार को दिया। उसने यह भी पूछा कि इन मजदूरों को पृथक कैसे किया जा रहा है। घर में पृथक किए जा रहे मजदूरों
की निगरानी कैसे की जा रही है, इसकी विस्तृत जानकारी क्यों नहीं दी गयी
है?
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि रंजन और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की पीठ ने 12 मई तक सरकार को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
मंगलवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल कर बताया गया कि केंद्र सरकार से कई संसाधन उसे उपलब्ध कराए गए हैं। राज्य सरकार ने कुछ और संसाधनों की मांग की है। साथ ही राज्य ने राशन वितरण और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने का आंकड़ा भी पेश किया किया। इस पर पीठ ने कहा कि राज्य सरकार का शपथ पत्र संतोषजनक
नहीं है। उसने कहा कि हर मामले में सिर्फ काम किया जा रहा है ऐसी जानकारी दी गयी है।
न्यायालय ने सरकार को बिंदुवार सटीक जानकारी का निर्देश दिया और 12 मई तक विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने को कहा।
सरकार ने अपने शपथपत्र में कहा है कि मजदूरों को लॉकडाउन में रांची से
पाकुड़, साहिबगंज और कोडरमा भेजे जाने के मामले में रांची के उपायुक्त ने
अपना स्पष्टीकरण दिया है। जवाब का अध्ययन किया जा रहा है इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। अगले सप्ताह सरकार कार्रवाई की रिपोर्ट अदालत में पेश करेगी।
सरकार ने न्यायालय को बताया कि राज्य के 3,51,536 लोगों के बीच राशन का वितरण किया गया है। प्रत्येक परिवार को दस किलोग्राम चावल एक अप्रैल से दिया जा रहा है। अप्रैल और मई का राशन एक साथ बांटा जा रहा है। इसी प्रकार 65.77 लाख लोगों को राज्य के 1336 दाल भात केंद्रों से भोजन कराया गया है।
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