देश की खबरें | अकाल तख्त के जत्थेदार ने पंजाब के गांवों में ‘ईसाई धर्म के प्रसार’ पर चिंता जताई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पंजाब में “ईसाई धर्म के प्रसार” पर चिंता व्यक्त करते हुए अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने सोमवार को कहा कि राज्य के ग्रामीण हिस्सों में काफी संख्या में “गिरजाघर और मस्जिद” बनाए जा रहे हैं। उन्होंने सिख प्रचारकों से सिख धर्म को बढ़ावा देने के लिए गांवों का दौरा करने का आग्रह किया।

अमृतसर, छह जून पंजाब में “ईसाई धर्म के प्रसार” पर चिंता व्यक्त करते हुए अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने सोमवार को कहा कि राज्य के ग्रामीण हिस्सों में काफी संख्या में “गिरजाघर और मस्जिद” बनाए जा रहे हैं। उन्होंने सिख प्रचारकों से सिख धर्म को बढ़ावा देने के लिए गांवों का दौरा करने का आग्रह किया।

जत्थेदार ने यहां ‘ऑपरेशन ब्लूस्टार’ की 38वीं बरसी के अवसर पर अकाल तख्त के मंच से सिख समुदाय को अपना पारंपरिक संबोधन देते हुए यह भी कहा कि सिख समुदाय को सिख मार्शल आर्ट और अन्य विरासत हथियारों को चलाने के लिये युवाओं के प्रशिक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “आज हम कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं जो हमें धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक मोर्चों पर कमजोर कर रही हैं। धार्मिक मोर्चे पर हमें कमजोर करने के लिए पंजाब में ईसाई धर्म का जोरदार प्रचार किया जा रहा है।”

अकाल तख्त के जत्थेदार ने कहा कि पंजाब के गांवों में बड़ी संख्या में “गिरजाघर और मस्जिद” बनाए जा रहे हैं, “यह हमारे लिए चिंता और विचार का विषय है”।

उन्होंने कहा कि पुराने सिखों और संतों की तरह सिख धर्म का प्रचार करने के लिए आगे आकर सिख संस्थानों और जत्थेबंदियों (संगठनों) को इससे निपटना चाहिए।

उन्होंने सिख धर्म से जुड़े सभी प्रतिष्ठित लोगों से राज्य के गांवों, खासकर सीमावर्ती गांवों का दौरा करने और सिख धर्म को मजबूत करने की अपील की।

जत्थेदार ने बताया कि वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलने का समय आ गया है और कहा कि सिख प्रचारकों और विद्वानों को सिख धर्म को बढ़ावा देने और युवाओं को समृद्ध सिख सिद्धांतों और इतिहास से अवगत कराने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, “हमें यह समझने की जरूरत है कि अगर हम धार्मिक मोर्चे पर कमजोर हैं, तो हम आर्थिक और सामाजिक मोर्चों पर मजबूत नहीं होंगे और फिर राजनीतिक रूप से भी हम कमजोर होंगे।”

जत्थेदार ने कहा कि सिखों को गुरुओं के समय से राज (संप्रभुता) के दृढ़ संकल्प का आशीर्वाद मिला है, जिसे सिख अब भी अपनी दैनिक ‘अरदास’ में ‘राज करेगा खालसा’ के रूप में दोहराते हैं।

उन्होंने कहा, “इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए सिख युवाओं को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्राप्त करके दुनिया में आगे बढ़ना होगा। साथ ही, सिख समुदाय के लिए विरासत के रूप में प्राप्त सिख मार्शल आर्ट (गतका) में कुशल होना अनिवार्य है।”

उन्होंने कहा कि सिख समुदाय को सिख मार्शल आर्ट और अन्य विरासत हथियारों को चलाने के लिये युवाओं के प्रशिक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए और आवश्यकतानुसार आधुनिक हथियारों के प्रशिक्षण के वास्ते शूटिंग रेंज भी स्थापित करनी चाहिए।

जत्थेदार ने कई युवाओं के नशे की लत पर भी चिंता व्यक्त की और इस संकट से लड़ने की आवश्यकता के बारे में बात की।

इस बीच, इस अवसर पर स्वर्ण मंदिर में कट्टरपंथी सिख संगठनों के साथ-साथ शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के समर्थकों द्वारा खालिस्तान समर्थक नारे लगाए गए।

सिखों की सर्वोच्च अकाल तख्त के पास स्वर्ण मंदिर में संगमरमर के परिसर में खालिस्तान समर्थक नारों की गूंज सुनाई दी।

इस दौरान कई युवक हाथ में तख्तियां थामे नजर आए, जिन पर ‘‘खालिस्तान जिंदाबाद’’ लिखा हुआ था। उन्होंने मारे गए अलगाववादी नेता जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीर वाली ‘टी-शर्ट’ भी पहन रखी थी।

मौके पर मौजूद पूर्व सांसद सिमरनजीत सिंह मान के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के कार्यकर्ताओं ने भी खालिस्तान समर्थक नारे लगाए। उन्होंने पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या का मुद्दा भी उठाया और उनके परिवार के लिए न्याय की मांग की।

वर्ष 1984 में स्वर्ण मंदिर से आतंकवादियों को बाहर निकालने के लिए एक सैन्य अभियान चलाया गया था, जिसे ‘ऑपरेशन ब्लूस्टार’ के नाम से जाना जाता है।

‘ऑपरेशन ब्लूस्टार’ की 38वीं बरसी पर अमृतसर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

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