देश की खबरें | शुक्रवार से खत्म हो जाएगी पुस्तक पंजीकरण अधिनियम के उल्लंघन के ज्यादातर मामलों में जेल की सजा

नयी दिल्ली, 31 अगस्त प्रकाशकों और प्रिंटिंग प्रेस मालिकों द्वारा प्रेस और पुस्तक पंजीकरण अधिनियम के अधिकांश प्रावधानों के उल्लंघन के मामलों में कारावास की सजा शुक्रवार से इतिहास बन जाएगी।

सरकार ने बृहस्पतिवार को अधिसूचना जारी की कि एक सितंबर, 2023 से प्रेस एवं पुस्तक पंजीकरण अधिनियम से जुड़ा ‘जन विश्वास अधिनियम’ प्रभावी होगा।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रेस एवं पुस्तक पंजीकरण अधिनियम के तहत उल्लंघन जैसे कि गलत विवरण के साथ मुद्रण, बिना उचित घोषणा के प्रेस रखना, गलत घोषणा करना, जानकारी का अनुचित रूप से खुलासा करने पर अब छह महीने की जेल की सजा नहीं होगी।

जन विश्वास अधिनियम में प्रेस एवं पुस्तक पंजीकरण अधिनियम के प्रावधानों 12, 13 और 14 के तहत जेल की सजा के प्रावधान को हटा दिया गया है।

प्रेस एवं पुस्तक पंजीकरण अधिनियम के प्रावधान 19 एल (जिसमें सूचना के अनुचित प्रकटीकरण के लिए अधिकतम छह महीने कारावास और 1,000 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान था) को कानून से हटा दिया गया है।

जन विश्वास अधिनियम के नए प्रावधान प्रेस रजिस्ट्रार को अनियमितता, प्रकाशन बंद करने, वार्षिक विवरण प्रस्तुत नहीं करने या गलत विवरण प्रस्तुत करने की सूरत में पंजीकरण प्रमाणपत्र को निलंबित करने और रद्द करने का अधिकार देते हैं।

जन विश्वास अधिनियम प्रेस और पंजीकरण अपीलीय बोर्ड (पीआरएबी) के अधिकार क्षेत्र में भी विस्तार करता है, जिसमें प्रेस रजिस्ट्रार को जुर्माना लगाने और पंजीकरण को निलंबित/रद्द करने का अधिकार दिया गया है।

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