कोलकाता, 11 मार्च कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार को राज्य पुलिस अकादमी (प्रशिक्षण) के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) मुरलीधर शर्मा को पश्चिम मेदिनीपुर जिले के एक महिला पुलिस थाने में वामपंथी छात्र नेता द्वारा लगाए गए शारीरिक उत्पीड़न के आरोपों पर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता सुचरिता दास ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि तीन मार्च को विद्यासागर विश्वविद्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें मेदिनीपुर शहर के महिला पुलिस थाने ले जाया गया, जहां उन्हें शारीरिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी शर्मा को याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की पृष्ठभूमि में थाने के सीसीटीवी फुटेज के साथ-साथ वहां उपलब्ध सभी डिजिटल सामग्रियों की जांच करने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति घोष ने निर्देश दिया कि रिपोर्ट 25 मार्च तक अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए और रिपोर्ट पर विचार करने के लिए मामला 26 मार्च के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया।
कोलकाता के यादवपुर विश्वविद्यालय में एक मार्च विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की घटनाओं को लेकर वामपंथी छात्र संघों ने पश्चिम बंगाल के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पांच मार्च को हड़ताल का आह्वान किया था।
एक मार्च को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदेश के शिक्षा मंत्री ब्रत्या बोस विश्वविद्यालय में एक बैठक के लिए गये थे।
न्यायमूर्ति घोष ने निर्देश दिया कि महिला पुलिस थाने की प्रभारी अधिकारी नौ अप्रैल तक घटना के विरोध में एक हलफनामा दायर करेंगी, जिसमें याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों का उल्लेख होगा।
उन्होंने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता द्वारा 17 अप्रैल तक हलफनामा दाखिल किया जाए।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि सुचरिता को महिला थाने में शारीरिक यातनायें दी गईं।
पश्चिम बंगाल के महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने कहा कि थाने में याचिकाकर्ता के ठहरने की वीडियो रिकॉर्डिंग है और उन्होंने दावा किया कि उसे किसी तरह की यातना नहीं दी गई बल्कि उसे वहां खाना परोसा गया।
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