ताजा खबरें | ‘विकसित भारत’ के लिए शिक्षा, अनुसंधान तथा विकास पर निवेश बढ़ाना होगा: विपक्षी सदस्यों ने रास में कहा

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. देश को 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के लक्ष्य में कृत्रिम मेधा प्रौद्योगिकी एवं अनुसंधान की अहम भूमिका होने का दावा करते हुए राज्यसभा में शुक्रवार को विभिन्न दलों के सदस्यों ने सरकार से शिक्षा एवं अनुसंधान तथा विकास पर अधिक ध्यान देने और इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने का अनुरोध किया।

नयी दिल्ली, 28 मार्च देश को 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के लक्ष्य में कृत्रिम मेधा प्रौद्योगिकी एवं अनुसंधान की अहम भूमिका होने का दावा करते हुए राज्यसभा में शुक्रवार को विभिन्न दलों के सदस्यों ने सरकार से शिक्षा एवं अनुसंधान तथा विकास पर अधिक ध्यान देने और इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने का अनुरोध किया।

शुक्रवार होने की वजह से आज उच्च सदन में निजी कामकाज हुआ। निर्दलीय सदस्य कार्तिकेय शर्मा ने सदन में अपना एक निजी संकल्प पेश करते हुए कहा कि आज अमेरिका, चीन और रूस जैसे देश तो प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपना प्रभुत्व बनाए हुए हैं लेकिन जापान, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया जैसे देश एआई तथा अन्य अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों की वजह से तेज गति से प्रगति कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अगर भारत 2047 में विकसित भारत बनना चाहता है तो उसे ऐसी प्रौद्योगिकियों में अगुवा बनना होगा। उन्होंने कहा कि साथ ही पूरी सतर्कता भी बरतनी होगी क्योंकि प्रौद्योगिकी जहां सृजन करती है वहीं वह संहार भी कर सकती है।

शर्मा ने कहा कि भारत एक युवा देश है जहां बड़ी आबादी युवाओं की है जो नवाचार करने में सक्षम हैं। ‘‘इसका लाभ उठाया जा सकता है। 90 करोड़ से अधिक लोग इंटरनेट का उपयोग करते हैं।’’

उन्होंने कहा कि आधार, यूपीआई, डिजी लॉकर से लेकर भारत की कई पहलें देश की ‘पब्लिक डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर’ तैयार करने की क्षमता को दर्शाती हैं और वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत 48वां स्थान भी है।

उन्होंने कहा कि ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी का उपयोग क्रिप्टोकरेंसी में किया जा सकता है और नतीजे सामने हैं। ‘‘लेकिन इसका उपयोग प्रशासन के लिए किया जा सकता है और यह बहुत उपयोगी होगी।’’

शर्मा ने कहा कि हरियाणा और आंध्रप्रदेश में इसकी प्रायोगिक परियोजना ने भू-रिकॉर्ड संबंधी कार्यों में बहुत ही अच्छे परिणाम दिए हैं और स्वास्थ्य क्षेत्र मे भी यह उपयोगी साबित हुई है।

उन्होंने कहा कि असैन्य परमाणु प्रौद्योगिकी भी डिजिटल अवसंरचना की मदद से बहुत ही अच्छे परिणाम दे सकती है। जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं, जिनसे निपटने में भी डिजिटल अवसंरचना मददगार हो सकती है।

आम आदमी पार्टी के संदीप कुमार पाठक ने कहा कि देश को नंबर एक बनाने के लिए प्रौद्योगिकियों की एक परिषद बनाने पर किसी को ऐतराज नहीं होगा।

पाठक ने कहा, ‘‘एआई अचानक नहीं आया है बल्कि यह तो बुनियादी गणित के समय से ही है। हमें अगर डिजिटल अवसंरचना की ओर ध्यान देना है तो सबसे पहले शिक्षा पर और अनुसंधान एवं विकास पर ध्यान देना होगा और निवेश बढ़ाना होगा।’’

उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को मिल कर काम करना होगा लेकिन आज जो माहौल है उसमें अलग दल की सरकार होने पर असहयोग की स्थिति आती है, वह नहीं होना चाहिए अन्यथा विकास हो ही नहीं पाएगा।

आप सदस्य ने कहा, ‘‘हमारे देश में जो बच्चे विज्ञान को प्राथमिकता देते हैं, उन्हें 11वीं कक्षा में जाने के बाद प्रयोगशाला में जाने मिलता है और वे वहां के उपकरण देखते हैं। ऐसे में हम विज्ञान में महारत की बात कैसे सोच सकते हैं।’’

उन्होंने कहा कि आज शिक्षा के मुद्दे पर देश में कहां सहमति है।

पाठक ने कहा, ‘‘एक और पहलू यह है कि अगर किसी तरह हमारे यहां प्रतिभा आगे बढ़ती भी है तो वह बाद में पलायन कर जाती है। इसका कारण यह है कि हमारे यहां उन्हें अनुकूल माहौल नहीं मिल पाता।’’

भाजपा के भागवत कराड़ ने कहा कि इस साल के बजट में अनुसंधान के लिए एक लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘अमृतकाल में भी इसे बढ़ावा दिया गया था। ’’

उन्होंने कहा कि कोविड काल में प्रौद्योगिकी का किस तरह उपयोग किया गया, यह सबने देखा है। ‘‘डिजिटल भारत को पूरी दुनिया देख चुकी है। अगर भारत आज दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना है तो उसमें निश्चित रूप से प्रौद्योगिकी का बहुत बड़ा योगदान है।’’

कराड ने कहा कि ‘अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन’ पांच फरवरी 2024 में अस्तित्व में आ चुका है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की डॉ फौजिया खान ने कहा कि एआई जहां विकास में योगदान दे सकता है वहीं इसके नकारात्मक परिणाम भी कम घातक नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में ड्रोन के जरिये जिस तरह से हथियार और मादक पदार्थ भेजा जा रहा है, उससे समझा जा सकता है कि आतंकवादी इसका कितना खतरनाक उपयोग कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि इस तरह की अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के लिए हमें कड़े नियमन, निगरानी और सजा की व्यवस्था करनी होगी। ‘‘यह भी देखना होगा कि राष्ट्र हित से कहीं कोई समझौता न होने पाए।’’

चर्चा में भाजपा के बृजलाल, कांग्रेस की जे बी माथेर हीशम, माकपा के डॉ वी शिवदासान और बीजू जनता दल के सस्मित पात्रा हिस्सा लिया। चर्चा अधूरी रही।

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