देश की खबरें | जांच में केवल चार लोगों ने शीर्ष महिला पहलवान के आरोपों की पुष्टि की : दिल्ली पुलिस का आरोपपत्र

नयी दिल्ली, 18 जुलाई दिल्ली पुलिस ने एक शीर्ष महिला पहलवान द्वारा भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के निवर्तमान प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच करते हुए 45 लोगों से पूछताछ की है, जिनमें से केवल चार ने आरोपों की पुष्टि की, जबकि अन्य ने ऐसी किसी भी घटना को देखने से इनकार किया है।

दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल आरोप पत्र के अनुसार, शिकायतकर्ता ने दावा किया कि यौन उत्पीड़न की तीन घटनाएं विदेश में और दो भारत में हुईं।

आरोपों की पुष्टि करने वाले चारों शिकायतकर्ता के रिश्तेदार हैं और उनमें से दो जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का हिस्सा थे।

जांच के तहत घटनाओं की संक्षिप्त जानकारी देते हुए पुलिस ने कहा कि आरोपी पर भारतीय दंड संहिता (भादंसं) की धारा 354, 354-ए (एक महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना) और 354-डी (पीछा करना) के तहत अपराध के लिए मुकदमा चलाया जा सकता है और दंडित किया जा सकता है।

सिंह ने लगातार आरोपों को खारिज किया है और दावा किया है कि उन्हें “फंसाया” गया है।

एक शिकायत आरोपी द्वारा महिला पहलवान का अपमान करने के बारे में है और दूसरी डब्ल्यूएफआई द्वारा उसे दिए गए कारण बताओ नोटिस से संबंधित है।

आरोप पत्र के अनुसार, कजाकिस्तान के नूर सुल्तान में 2019 के विश्व चैंपियनशिप के दौरान आरोपी ने पीड़िता को “अनुचित तरीके से छुआ और सांस लेने की जांच करने के बहाने उसके स्तन पर अपना हाथ रखा और उसके पेट पर हाथ फेरा’’।

जकार्ता में 2018 के एशियाई खेलों के दौरान, आरोपी ने “उसे बहुत कसकर गले लगाया और उसे 15-20 सेकंड तक जाने नहीं दिया तथा उसे अपने वक्षस्थल की रक्षा करनी पड़ी।”

शिकायतकर्ता द्वारा बताई गई एक अन्य घटना में, सिंह ने मंगोलिया में 2016 के विश्व चैम्पियनशिप के दौरान उसके साथ छेड़छाड़ की। आरोप पत्र के अनुसार, पीड़िता को तब दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा, जब वह होटल में भोजन क्षेत्र में थी और सिंह ने उसके वक्ष और पेट को छुआ।

एक कथित घटना 16-17 अक्टूबर, 2017 को डब्ल्यूएफआई कार्यालय के अंदर छेड़छाड़ से संबंधित है।

आरोपपत्र में कहा गया, “शिकायतकर्ता को उसकी सहमति के बिना उसकी हथेली, घुटने, जांघ और कंधों पर गलत तरीके से छुआ गया।”

आरोप पत्र के अनुसार, यह डब्ल्यूएफआई ही था, जिसने तस्वीरों और वीडियो के रूप में तकनीकी साक्ष्य उपलब्ध कराए, जिससे यह स्थापित हुआ कि कथित घटनाएं होने पर आरोपी और पीड़ित ज्यादातर जगहों पर एक ही स्थान पर थे।

पुलिस ने पाया कि तकनीकी साक्ष्य आरोपी की उपस्थिति की सीमा तक शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप का “स्पष्ट रूप से समर्थन” करते हैं।

चार गवाहों ने जहां कथित दुर्व्यवहार की पुष्टि की, दिल्ली पुलिस ने यह भी लिखा कि, “सभी सात प्रशिक्षक, दो फिजियोथेरेपिस्ट, दो मालिश करने वाले, एक मनोवैज्ञानिक, 11 पहलवान, तीन रेफरी से भी पूछताछ की गई, लेकिन उन सभी ने कथित घटनाओं को देखने से इनकार कर दिया”।

ये सभी लोग विभिन्न कुश्ती चैंपियनशिप के दौरान महिला पहलवानों के साथ मौजूद थे।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने 2022 में लखनऊ भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) केंद्र में राष्ट्रमंडल खेलों के ट्रायल के दौरान सार्वजनिक रूप से उसका नाम लेकर उसका अपमान किया और कहा कि वह उससे नाराज नहीं है और बाद में उससे बात करेगा।

आरोप पत्र के अनुसार, “पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया, एक पेन ड्राइव अपने कब्जे में ले ली, जिसमें ‘वीडियो रिकॉर्डिंग’ थी लेकिन किसी भी गवाह ने पीड़िता के बयान का समर्थन नहीं किया।”

एसएआई सेंटर, लखनऊ के कार्यकारी निदेशक संजय सारस्वत ने कार्यक्रम का वीडियो उपलब्ध कराया था।

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