जरुरी जानकारी | निर्यात संवर्धन मिशन के तहत नियम बनाने के लिए अंतर-मंत्रालयी वार्ता जल्द
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नयी दिल्ली, 17 फरवरी विदेश व्यापार महानिदेशक (डीजीएफटी) संतोष कुमार सारंगी ने सोमवार को कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के आम बजट में घोषित निर्यात संवर्धन मिशन के तहत निर्यातकों के लिए योजनाओं को अंतिम रूप देने के लिए जल्द ही अंतर-मंत्रालयी परामर्श किया जाएगा।
सारंगी ने कहा कि योजना का ब्योरा तैयार होने के बाद मंत्रालय केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी लेगा।
उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा कि वाणिज्य, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) और वित्त मंत्रालय इन योजनाओं पर काम कर रहे हैं।
सारंगी ने कहा, ‘ हम अंतर-मंत्रालयी परामर्श की प्रक्रिया में हैं, जिसके बाद हम योजना का विवरण तैयार करेंगे।’’
सरकार ने देश के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 2,250 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ निर्यात संवर्धन मिशन की स्थापना की एक फरवरी को घोषणा की थी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि मिशन के माध्यम से सरकार निर्यातकों को ऋण तक आसान पहुंच, सीमापार ‘फैक्टरिंग’ सहायता और विदेशी बाजारों में गैर-शुल्क उपायों से निपटने के लिए एमएसएमई को सहायता प्रदान करेगी।
‘फैक्टरिंग’, वित्तीय लेनदेन और देनदार वित्त का एक प्रकार है, जिसमें एक व्यवसाय अपने प्राप्य खातों (यानी चालान) को एक तीसरे पक्ष (जिसे फैक्टर कहा जाता है) को छूट पर बेचता है।
वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने कहा कि मिशन के तहत कई योजनाएं हैं और ‘‘ यह उन योजनाओं के अंतर्गत ही लागू है।’’
उन्होंने कहा कि ये योजनाएं ‘‘ नए बाजारों, नए निर्यातकों और नए उत्पादों’’ पर केंद्रित होंगी।
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