देश की खबरें | मैनपुरी मामले में डीजीपी को बृहस्पतिवार को भी हाजिर रहने का निर्देश

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में स्कूल में एक छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को इस मामले से अवगत कराने के लिए बृहस्पतिवार को भी अदालत में हाजिर रहने का बुधवार को निर्देश दिया। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) इस मामले में बुधवार को अदालत में पेश हुए।

प्रयागराज, 15 सितंबर उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में स्कूल में एक छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को इस मामले से अवगत कराने के लिए बृहस्पतिवार को भी अदालत में हाजिर रहने का बुधवार को निर्देश दिया। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) इस मामले में बुधवार को अदालत में पेश हुए।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मुनीश्वर नाथ भंडारी और न्यायमूर्ति ए के ओझा की पीठ ने महेंद्र प्रताप सिंह द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। सिंह का आरोप है कि पुलिस इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कर रही, बल्कि वह आरोपियों को बचा रही है और यहां तक कि एसआईटी भी स्वतंत्र कार्य नहीं कर रही।

पीठ ने कहा, “हम इस तरह के मामलों को बहुत गंभीरता से लेते हैं। यह मत सोचिये कि वह एक गरीब की बेटी थी, वह देश की बेटी थी। हमें उम्मीद है कि उन दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी जिन्होंने इस मामले की ना तो सही ढंग से जांच की और ना ही चिकित्सा साक्ष्यों को एकत्र कर उसे समय पर फॉरेंसिक लैब भेजा।”

पीठ ने कहा, “अदालत द्वारा इस मामले में गंभीरता दिखाए जाने और दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश के बावजूद आगे की कोई कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि इस मामले की जानकारी पुलिस महानिदेशक को भी नहीं दी जा रही।”

अदालत ने कहा, “ इसे देखते हुए इस मामले की सुनवाई बृहस्पतिवार को करने के अलावा हमारे पास कोई उपाय नहीं है। जांच संबंधी कार्रवाई से अवगत कराने और यह बताने कि मैनपुरी के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के सेवानिवृत्त होने से पहले उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई, पुलिस महानिदेशक और एसआईटी के सदस्य अदालत में उपस्थित रहेंगे।”

इससे पहले, मंगलवार को पीठ ने पूरे मामले का रिकॉर्ड देखने के बाद कहा था कि इस मामले में पाया गया कि यद्यपि 16 सितंबर, 2019 को हुई घटना की प्राथमिकी अगले दिन ही दर्ज की गई। हालांकि, आरोपी से पूछताछ समय पर नहीं की गई बल्कि करीब तीन माह बाद की गई।

अदालत ने कहा कि ऐसा लगता है कि इस मामले की जांच कर रही एसआईटी टीम स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रही है।

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