देश की खबरें | पाक के बजाय, जम्मू-कश्मीर के युवाओं से बात करेंगे: शाह ने फारूक अब्दुल्ला की सलाह पर कहा

श्रीनगर, 25 अक्टूबर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पाकिस्तान के साथ बातचीत की मांग को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला पर सोमवार को निशाना साधा और कहा कि इसके बजाय सरकार कश्मीर घाटी के ‘‘बहनों और भाइयों’’ से बात करेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने की एकमात्र मंशा कश्मीर और जम्मू को विकास के रास्ते पर लाने की थी तथा लोग 2024 तक ‘‘हमारे प्रयासों का फल देखेंगे।’’

अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान समाप्त किये जाने के बाद अपनी पहली यात्रा पर जम्मू कश्मीर पहुंचे शाह ने कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया और कई अन्य की आधारशिला रखी।

यहां एक समारोह में अपने 38 मिनट लंबे भाषण की शुरुआत करने से पहले गृह मंत्री ने मंच पर लगे बुलेट प्रूफ ग्लास को हटवा दिया।

बाद में, उन्होंने लोगों से कहा कि वह उनके साथ "मन की बात" करना पसंद करते हैं।

शाह ने भारी सुरक्षा वाले शेर ए कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "आज, मैं आपसे बिना सुरक्षा और बिना बुलेट प्रूफ ग्लास के खुले दिल से बात करना चाहता हूं। और, यहां मैं आपके सामने हूं।"

गृह मंत्री ने कहा, ‘‘मित्रो, आज मैंने अखबारों में देखा कि फारूक अब्दुल्ला ने सुझाव दिया है कि सरकार को पाकिस्तान से बात करनी चाहिए। उन्हें अपनी राय रखने का अधिकार है, लेकिन मैं कश्मीर घाटी के बहन-भाइयों और कश्मीर घाटी के युवाओं से बात करना करना चाहूंगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का केवल एक ही इरादा था- कश्मीर, जम्मू और नवनिर्मित लद्दाख (केंद्र शासित प्रदेश) को विकास के रास्ते पर लाना। आप 2024 तक हमारे प्रयासों का फल देखेंगे।’’

गृह मंत्री ने कहा, "अगली बार जब वे (स्थानीय नेता) आपको अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद जमीन छीनने के बारे में गुमराह करें, तो उन्हें बताएं कि आपके गांव या क्षेत्र में कितनी जमीन छीनी गई है। अगस्त 2019 से दो वर्ष में कोई जमीन नहीं छीनी गई है।"

पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को अगस्त 2019 में निरस्त कर दिया गया था और राज्य को जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख के रूप में दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया।

शाह ने बेमिना में 115 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 500 बिस्तरों वाले अस्पताल का उद्घाटन किया, हंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज, बारामूला जिले के फिरोजपुर नाले पर 46 करोड़ रुपये के स्टील गर्डर पुल और 4,000 करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं तथा अन्य की आधारशिला रखी।

गृह मंत्री ने कहा कि इस्लामाबाद और अलगाववादियों के साथ बातचीत की वकालत करने वालों से पूछा जाना चाहिए कि पाकिस्तान ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में क्या किया है?

उन्होंने कहा, ‘‘इस तरफ और पीओके के बीच के विकास की तुलना करें। क्या उनके पास बिजली, सड़क, स्वास्थ्य सेवा और शौचालय हैं। वहां (दूसरी तरफ) कुछ भी नहीं है। आपके (कश्मीरियों) के पास किसी भी अन्य भारतीय के समान अधिकार हैं।"

कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी का नाम लिए बिना शाह ने कहा कि "जम्मू कश्मीर पर शासन करने वाले तीन परिवारों" द्वारा जहां केवल तीन मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए थे, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सात नए मेडिकल कॉलेज सुनिश्चित किए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘पहले 500 युवा डॉक्टर बन सकते थे... अब इन नए मेडिकल कॉलेजों से 2,000 युवा डॉक्टर बन सकते हैं। किसी को भी मेडिसिन की पढ़ाई के लिए पाकिस्तान जाने की जरूरत नहीं होगी।’’

शाह ने कहा कि मोदी सरकार की योजनाएं यह सुनिश्चित करेंगी कि जम्मू-कश्मीर देश का सबसे विकसित प्रांत होगा।

उन्होंने इसके लिए लोगों का सहयोग मांगा और कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर के युवा ही इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम कर सकते हैं।’’ गृह मंत्री ने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि कश्मीर के युवा किताब उठाएं, न कि पत्थर, वे अपना भविष्य चमकाने के लिए उपकरण उठाएं, न कि हथियार।’’

शाह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य जम्मू-कश्मीर से आतंकवाद का सफाया और नागरिकों की हत्या की घटनाओं के खात्मे का है। उन्होंने कहा कि किसी को भी केंद्रशासित प्रदेश में शांति और विकास को बाधित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिसका प्रधानमंत्री मोदी के दिल में एक विशेष स्थान है।

अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध और कर्फ्यू लगाने का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि ‘‘कुछ लोग जनता को गुमराह करते। कौन मारे जाते ? कश्मीरी युवक। हम जानते हैं कि किसी बुजुर्ग के लिए एक युवा बेटे का ताबूत कितना भारी होता है।’’

उन्होंने कहा कि कश्मीर में हिंसा में 40,000 लोग मारे गए हैं और यह अब बंद होनी चाहिए।

शाह ने कहा, ‘‘इतने लोग युद्ध में भी नहीं मरते हैं। हमें वापस आना होगा और कश्मीर को विकास की नई ऊंचाई पर ले जाना होगा।’’

गृह मंत्री ने कहा कि केंद्रशासित प्रदेश में 12,000 करोड़ रुपये का निवेश पहले ही हो चुका है और स्थानीय युवाओं को पांच लाख नौकरियां प्रदान करने के लिए सरकार का लक्ष्य 2022 के अंत तक कुल 51,000 करोड़ रुपये के निवेश का है।

शाह ने कहा कि ‘‘तीन परिवार’’ पिछले सात दशकों में जम्मू-कश्मीर के विकास में विफलता के लिए लोगों के प्रति उत्तरदायी हैं।

शाह ने कहा, ‘‘मोदी के नेतृत्व में विकास का नया चरण जम्मू-कश्मीर में शुरू हो गया है, लेकिन असामाजिक तत्वों द्वारा बाधाएं पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। मैं यहां आपको आश्वस्त करने के लिए आया हूं कि कोई भी बाधा पैदा करने और शांति तथा विकास को बाधित करने में सफल नहीं हो पाएगा।’’

उन्होंने कहा कि विकास का एक नया चरण शुरू हो गया है और इसे कोई नहीं रोक सकता।

गृह मंत्री ने कहा, ‘‘तीनों परिवार कहते थे कि कौन आएगा और जम्मू-कश्मीर में निवेश करेगा.... नई औद्योगिक नीति की घोषणा के बाद सिर्फ छह महीनों में, हमें जम्मू में 7,000 करोड़ रुपये और कश्मीर में 6,000 करोड़ रुपये का निवेश मिला है तथा 2022 के अंत तक 50,000 करोड़ रुपये के निवेश को लेकर आशान्वित हैं।’’

उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में पांच लाख नौकरियां सृजित की जा रही हैं और पिछले दो साल में 20 हजार लोगों को सरकारी नौकरियां उपलब्ध कराई गई हैं।

शाह ने ‘‘तीन परिवारों’’ पर निशाना साधते हुए कहा कि वे पूछ रहे थे कि सरकार जम्मू-कश्मीर को क्या देने जा रही है?

उन्होंने कहा, ‘‘हमने जम्मू-कश्मीर को जो कुछ दिया है उसकी एक लंबी सूची है और लोग इसे अच्छी तरह से जानते हैं लेकिन लोग उनसे जवाब मांग रहे हैं कि पिछले सात दशकों से तत्कालीन राज्य पर शासन करने के बावजूद उन्होंने जम्मू-कश्मीर को क्या दिया है। क्या आपने अपने परिवार के सदस्यों के अलावा किसी और के बारे में सोचा?’’

शाह ने ‘‘तीन परिवारों’’ पर पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य के पर्यटन उद्योग को बर्बाद करने का आरोप लगाया। उन्होंने हालांकि कहा कि मार्च 2020 से मार्च 2021 तक 1.34 लाख पर्यटक घाटी आए हैं। उन्होंने दावा किया कि यहां पर्यटकों की यह आवक स्वतंत्रता के बाद सर्वाधिक है।

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