देश की खबरें | भारत को आर्थिक विकास का अपना प्रतिमान विकसित करना चाहिए: संघ पदाधिकारी
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नयी दिल्ली, 10 सितंबर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने शनिवार को दावा किया कि जीडीपी एक “असंगत” मानक है और भारत को रोजगार-सृजित वृद्धि पर ध्यान केंद्रित करते हुए विकास का अपना प्रतिमान विकसित करना चाहिए।
बजरंग लाल गुप्ता ने कहा कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) भारत जैसे देश में सही तस्वीर पेश नहीं करता और विकास को आंकने का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना नहीं हो सकता।
जीडीपी किसी देश में एक तय अवधि के दौरान वस्तुओं के उत्पादन और सेवाओं का कुल मूल्य का आकलन है।
उन्होंने दलील दी, “भारत के संदर्भ में जीडीपी असंगत है क्योंकि इसमें उन सेवाओं को शामिल नहीं किया जाता जिनके लिये कीमत नहीं चुकाई जाती, जबकि पश्चिमी देशों में उनके लिये शुल्क लिया जाता है।”
संघ पदाधिकारी गुप्ता आईआईएलएम विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। विश्वविद्याल के दिल्ली-एनसीआर में तीन परिसर हैं।
उन्होंने आर्थिक विकास के भारतीय प्रतिमान “सुमंगलम” का सुझाव दिया जो रोजगार-सृजित वृद्धि पर जोर देता है।
गुप्ता ने कहा, “इस प्रतिमान की पांच विशेषताएं सभी नागरिकों को मूलभूत जरूरतों को पूरा करना, सभी के लिये रोजगार,शिक्षा में समान अवसर, स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराना और नागरिकों की आंतरिक व बाह्य सुरक्षा सुनिश्चित करना हैं।”
उन्होंने कहा कि पूंजीवादी और वामपंथी प्रतिमानों की तरफ देखने के बजाय भारत को अपना आर्थिक पैमाना विकसित करना चाहिए।
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