नयी दिल्ली, चार जुलाई विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि भारत सरकार आस्था और धर्म से जुड़े मामलों में कोई पक्ष नहीं लेती है।
मंत्रालय ने यह टिप्पणी दलाई लामा के इस बयान के दो दिन बाद की है जिसमें उन्होंने कहा था कि तिब्बती बौद्धों के एक ट्रस्ट को ही उनके उत्तराधिकारी को तय करने का अधिकार होगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सरकार ने भारत में सभी के लिए धार्मिक स्वतंत्रता को हमेशा बरकरार रखा है और आगे भी ऐसा करती रहेगी। उन्होंने कहा, ‘‘हमने दलाई लामा संस्था की निरंतरता के बारे में माननीय दलाई लामा द्वारा दिए गए बयान से संबंधित रिपोर्ट देखी है।’’
जायसवाल ने कहा, ‘‘भारत सरकार आस्था और धर्म से जुड़े मामलों में कोई पक्ष नहीं लेती है और न ही बोलती है।’’
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता छह जुलाई को दलाई लामा के 90वें जन्मदिन से पहले उनके बयान के संबंध में पत्रकारों के प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे।
तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने बुधवार को कहा था कि दलाई लामा की संस्था जारी रहेगी। उन्होंने कहा था कि गादेन फोडरंग ट्रस्ट के पास भावी दलाई लामा को मान्यता देने का एकमात्र अधिकार है।
उन्होंने बयान में कहा था, ‘‘मैं पुनः दोहराता हूं कि गादेन फोडरंग ट्रस्ट के पास भावी उत्तराधिकारी को मान्यता देने का एकमात्र अधिकार है। इस मामले में किसी और को हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है।’’
इस ट्रस्ट की स्थापना 2015 में दलाई लामा द्वारा दलाई लामा संस्थान से संबंधित मामलों की देखरेख के लिए की गई थी।
दलाई लामा की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए चीन ने कहा कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी को चीनी सरकार द्वारा मंजूरी दी जानी चाहिए।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY