देश की खबरें | कोटा में छात्रों की बढ़ती आत्महत्याओं ने बेहतर निवारण तंत्र की जरूरत को रेखांकित किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राजस्थान के कोटा में कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की खुदकुशी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इससे आत्महत्या रोकने के लिए लागू किए गए निवारण तंत्रों को लेकर फिर से सवाल खड़े हो गए।

कोटा (राजस्थान), छह अगस्त राजस्थान के कोटा में कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की खुदकुशी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इससे आत्महत्या रोकने के लिए लागू किए गए निवारण तंत्रों को लेकर फिर से सवाल खड़े हो गए।

कोटा में जेईई की तैयारी कर रहे 17 वर्षीय छात्र ने शुक्रवार को आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद इस साल अबतक कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले कुल 18 विद्यार्थी अपनी जान दे चुके हैं। इससे शिक्षकों, माता-पिता, छात्रावास मालिकों एवं अधिकारियों के माथे पर चिंता की शिकन आ गई है।

खुदकुशी की बढ़ती घटनाएं तंत्र को मजबूत करने की जरूरत की ओर इशारा कर रहे हैं। हालांकि बीते आठ साल से ऐसे कई उपाय किए गए हैं जिससे विद्यार्थी तनाव में न आएं और अपनी जान देने की हद तक नहीं जाएं। इनमें कोचिंग संस्थान में मनोवैज्ञानिकों की तैनाती, नियमित तौर पर मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन, साप्ताहिक अवकाश, फीस वापसी की नीति व छात्र हेल्पलाइन डेस्क स्थापित करना शामिल है, लेकिन लगता है कि ये कदम समस्या का समाधान करने में नाकाम रहे हैं।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) एवं छात्र हेल्पडेस्क के प्रभारी चंद्रशील ठाकुर ने कहा कि कोटा में किशोरों द्वारा आत्महत्या करने के प्रमुख कारणों में सामाजिक व हमउम्र लोगों का दबाव, माता-पिता की अपेक्षाएं, पढ़ने का नया माहौल, घर से दूर रहने के कारण नाखुश रहना, अतिव्यस्त दिनचर्या का पालन करने में नाकाम रहना शामिल है।

एएसपी ने कहा कि कोचिंग संस्थान पैसा कमाने के चक्कर में औसत या कमज़ोर विद्यार्थी को दाखिला दे देते हैं लेकिन माता-पिता अपने बच्चे की वास्तविक क्षमताओं से वाकिफ होते हैं।

कोटा सरकारी मेडिकल कॉलेज में मनोविज्ञान विभाग में वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ चंद्रशेखर सुशील ने बताया कि आईआईटी-जेईई और नीट-यूजी जैसी प्रवेश परीक्षाएं पास करना एक होनहार विद्यार्थी तक के लिए आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके लिए दिन रात एक करना होता है।

सुशील ने कहा कि बढ़ती आत्महत्याओं के लिए कोचिंग संस्थान जिम्मेदार नहीं हैं। उन्होंने कहा, "कोचिंग व्यवस्था को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वे विद्यार्थियों को परीक्षा में उत्तीर्ण करने के लिए उत्साहपूर्वक कड़ी मेहनत कराएं और इस मकसद के लिए वे फीस वसूलते हैं, लेकिन जो लोग कड़ी मेहनत नहीं कर सकते हैं या अभी तक तैयार नहीं हैं, उन्हें पाठ्यक्रम में शामिल होने से बचना चाहिए।"

मीडिया की खबरों और पुलिस से जमा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2015 से (2020-2021 को छोड़कर) अबतक 113 विद्यार्थी आत्महत्या कर चुके हैं। 2020-21 वे कोविड के कारण अपने घर चले गए थे।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने 2015 में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि कोटा में खुदकुशी के मामलों में 61.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जिनमें ज्यादातर विद्यार्थी हैं। इसके बाद मीडिया ने इस ओर ध्यान देना शुरू किया।

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