जरुरी जानकारी | सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं में 2013-14 से 2017-18 के बीच 14.2 लाख की वृद्धि

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. वित्त वर्ष 2013-14 से 2017-18 के बीच लगभग 14.2 लाख सूक्ष्म सिंचाई योजनाएं बढ़ी हैं। शनिवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।

नयी दिल्ली, 26 अगस्त वित्त वर्ष 2013-14 से 2017-18 के बीच लगभग 14.2 लाख सूक्ष्म सिंचाई योजनाएं बढ़ी हैं। शनिवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।

लघु सिंचाई (एमआई) योजनाओं की छठी गणना के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर भूजल और सतही जल, दोनों योजनाओं की संख्या में वृद्धि हुई है।

आंकड़ों के अनुसार 2.31 करोड़ एमआई योजनाओं में 2.19 करोड़ (94.8 प्रतिशत) भूजल योजनाएं हैं, जबकि 12.1 लाख (5.2 प्रतिशत) को सतही जल योजनाओं के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

यह सिंचाई आवश्यकताओं के लिए भूजल संसाधनों पर पर्याप्त निर्भरता को दर्शाता है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण छठी गणना को जारी करने में देरी हुई और सातवीं गणना पर काम शुरू किया जा चुका है।

आंकड़ों से पता चला कि एमआई योजनाओं में सबसे बड़ी हिस्सेदारी उत्तर प्रदेश की है, जिसके बाद महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु हैं।

नवीनतम गणना के अनुसार इन लघु सिंचाई योजनाओं में लगभग 14.2 लाख की वृद्धि हुई है। पांचवीं गणना में 2.17 करोड़ की तुलना में छठी जनगणना में कुल 2.31 करोड़ योजनाएं दर्ज की गईं।

भूजल योजनाओं में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्यों का दबदबा है, जबकि सतही जल योजनाओं में महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा और झारखंड की हिस्सेदारी सबसे अधिक है।

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