देश की खबरें | नये संसद भवन का उद्घाटन: विपक्षी दलों का प्रधानमंत्री पर हमला तेज, भाजपा ने शामिल होने की अपील की
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. विपक्ष ने नए संसद भवन के उद्घाटन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बृहस्पतिवार को अपना हमला तेज कर दिया और कांग्रेस ने कहा कि ‘‘एक आदमी के अहंकार और आत्म-प्रचार की इच्छा’’ ने पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति को परिसर के उद्घाटन के संवैधानिक विशेषाधिकार से वंचित कर दिया है।
नयी दिल्ली, 25 मई विपक्ष ने नए संसद भवन के उद्घाटन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बृहस्पतिवार को अपना हमला तेज कर दिया और कांग्रेस ने कहा कि ‘‘एक आदमी के अहंकार और आत्म-प्रचार की इच्छा’’ ने पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति को परिसर के उद्घाटन के संवैधानिक विशेषाधिकार से वंचित कर दिया है।
रविवार को होने वाले नये संसद भवन के उद्घाटन को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गये हैं। विपक्षी दलों के आरोपों पर पलटवार करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि इन दलों ने उद्घाटन का बहिष्कार करने का फैसला केवल इसलिए किया है, क्योंकि इसका निर्माण प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर किया गया है।
भाजपा ने विपक्षी दलों से यह अपील भी की कि ‘बड़ा दिल’ दिखाकर संसद के उद्घाटन के ऐतिहासिक दिवस का हिस्सा बनें।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा रविवार को नये संसद भवन के उद्घाटन समारोह में करीब 25 राजनीतिक दलों के शामिल होने की संभावना है, वहीं करीब 21 दलों ने समारोह के बहिष्कार का फैसला किया है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समेत सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के 18 घटक दलों के साथ ही सात गैर-राजग दल समारोह में शामिल होंगे।
बहुजन समाज पार्टी, शिरोमणि अकाली दल, जनता दल (सेक्युलर), लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास), वाईएसआर कांग्रेस, बीजू जनता दल और तेलुगू देशम पार्टी समारोह में शामिल होने वाले सात गैर-राजग दल हैं। इन दलों के लोकसभा में 50 सांसद हैं। इनकी मौजूदगी से सरकार को विपक्ष के उन आरोपों को खारिज करने में मदद मिलेगी कि यह पूरी तरह सरकारी कार्यक्रम है।
भाजपा के अलावा शिवसेना, नेशनल पीपुल्स पार्टी, नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी, सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा, जननायक जनता पार्टी, अन्नाद्रमुक, आईएमकेएमके, आजसू, आरपीआई, मिजो नेशनल फ्रंट, तमिल मनीला कांग्रेस, आईटीएफटी (त्रिपुरा), बोडो पीपुल्स पार्टी, पीएमके, एमजीपी, अपना दल और एजीपी के नेता समारोह में शामिल होंगे।
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि विपक्षी दलों की ओर से नये संसद भवन के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करना अनुचित है।
उन्होंने नये संसद भवन के उद्घाटन को लेकर बृहस्पतिवार को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं और स्पष्ट कर दिया कि उनका रुख इस मामले में अन्य विपक्षी दलों से अलग है।
हालांकि, मायावती ने यह भी कहा कि पूर्व निर्धारित व्यस्तता के कारण वह उद्घाटन समारोह में शामिल नहीं हो सकेंगी।
बसपा प्रमुख ने कहा कि ''इसे जनजातीय महिला के सम्मान से जोड़ना भी अनुचित है। यह उन्हें (द्रौपदी मुर्मू को) निर्विरोध ना चुनकर उनके विरुद्ध उम्मीदवार खड़ा करते वक्त सोचना चाहिए था।’’
कांग्रेस, वाम दल, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी समेत 21 विपक्षी दलों ने संसद के नए भवन के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करने की घोषणा की और आरोप लगाया कि केंद्र की मौजूदा सरकार के तहत संसद से लोकतंत्र की आत्मा को ही निकाल दिया गया है।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि संसद के नए भवन का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को करना चाहिए और अगर ऐसा नहीं होता है तो उनकी पार्टी उद्घाटन समारोह में शामिल नहीं होगी।
तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह नयी दिल्ली में 28 मई को होने जा रहे नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में शामिल होगी।
पार्टी की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, तेदेपा प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू ने राज्यसभा सदस्य कनकमेदला रवींद्र कुमार को नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में पार्टी का प्रतिनिधित्व करने को कहा है।
इसमें कहा गया है कि लोकसभा महासचिव की ओर से आमंत्रण मिलने के बाद तेदेपा प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने यह फैसला किया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के ‘अहंकार’ ने संसदीय प्रणाली को ‘ध्वस्त’ कर दिया है।
खरगे ने ट्वीट किया, ‘‘मोदी जी, संसद जनता द्वारा स्थापित लोकतंत्र का मंदिर है। राष्ट्रपति का पद संसद का प्रथम अंग है। आपकी सरकार के अहंकार ने संसदीय प्रणाली को ध्वस्त कर दिया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘140 करोड़ भारतीय जानना चाहते हैं कि भारत के राष्ट्रपति से संसद भवन के उद्घाटन का हक छीनकर आप क्या जताना चाहते हैं?’’
ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस ने मोदी सरकार पर नये संसद भवन के उद्घाटन के लिए देश की राष्ट्रपति को निमंत्रित नहीं कर आदिवासियों का ‘अपमान करने’ का आरोप लगाया और इस कदम के विरूद्ध 26 मई को देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान किया।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट किया, ‘‘कल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रांची में झारखंड उच्च न्यायालय में देश के सबसे बड़े न्यायिक परिसर का उद्घाटन किया। एक व्यक्ति के अहंकार और स्व-प्रचार की इच्छा ने प्रथम आदिवासी महिला राष्ट्रपति को 28 मई को नयी दिल्ली में संसद के नए भवन के उद्घाटन के उनके संवैधानिक विशेषाधिकार से वंचित कर दिया है।’’
उन्होंने प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए कहा, ‘‘अशोक द ग्रेट, अकबर द ग्रेट, मोदी द इनॉग्युरेट।’’
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने नए संसद भवन को भारत के गौरव का प्रतीक करार देते हुए विपक्षी दलों से 28 मई को इसके उद्घाटन के ‘ऐतिहासिक दिन’, ‘बड़ा दिल’ दिखाकर शामिल होने की अपील की।
उन्होंने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हम सभी राष्ट्रपति का सम्मान करते हैं। मैं कांग्रेस द्वारा उनके बारे में कही गई बातों को याद कर आज राष्ट्रपति पद को किसी विवाद में नहीं घसीटना चाहता। लेकिन भारत के प्रधानमंत्री भी संसद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री के पास संवैधानिक जिम्मेदारी भी है।’’
प्रसाद ने विपक्षी नेताओं से आग्रह किया कि वे कार्यक्रम के बहिष्कार को विपक्षी एकता बनाने के मंच के रूप में इस्तेमाल न करें। उन्होंने कहा कि इसके लिए और कई और अवसर आएंगे।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नये संसद भवन के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करने के विपक्षी दलों के ऐलान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि विपक्ष का रवैया गैर जिम्मेदाराना और लोकतंत्र को कमजोर करने वाला है।
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने अपने बयान का एक वीडियो ट्विटर पर साझा करते हुए कहा कि 'स्वतंत्र भारत के इतिहास में 28 मई की तारीख एक गौरवशाली तिथि के रूप में दर्ज होने जा रही है, जब देश के यशस्वी प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) द्वारा भारत के लोकतंत्र की प्रतीक नई संसद भारतवासियों को भेंट की जाएगी।'
कुछ विपक्षी नेताओं ने मोदी सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओब्रायन ने कहा, ‘‘भारत की विविधता और बहुलता का प्रतिनिधित्व कर रहे 20 दलों द्वारा संसद भवन के उद्घाटन का बहिष्कार एक तानाशाही सरकार द्वारा संसदीय परंपराओं के बहिष्कार का जवाब है।’’
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने राष्ट्रपति द्वारा ही संसद भवन का उद्घाटन कराये जाने पर जोर देते हुए कहा, ‘‘राष्ट्रपति न केवल गणराज्य प्रमुख हैं, बल्कि संसद की भी प्रमुख हैं। प्रधानमंत्री कार्यपालिका के प्रमुख हैं, विधायिका के नहीं।’’
तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता साकेत गोखले ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रत्येक वंदे भारत ट्रेन का उद्घाटन करने और कोविड टीका प्रमाणपत्रों पर प्रधानमंत्री की तस्वीर छपी होने का जिक्र करते हुए कहा कि यह ‘‘तानाशाहों की निशानी’’ है।
भाकपा सांसद बिनय विस्वम ने कहा कि विपक्ष ने जो मुद्दे उठाये हैं, उन पर जवाब नहीं मिले हैं। उन्होंने पूछा कि सरकार ने विपक्ष से यह कैसे कह दिया कि वह उद्घाटन समारोह के बहिष्कार के फैसले पर पुनर्विचार करे।
विपक्षी दलों का तर्क है कि राष्ट्रपति मुर्मू को संसद भवन के उद्घाटन का सम्मान मिलना चाहिए, क्योंकि वह न केवल राष्ट्राध्यक्ष हैं, बल्कि संसद का अभिन्न हिस्सा भी हैं क्योंकि वह संसद सत्र बुलाती हैं, सत्रावसान करती हैं और संसद में अभिभाषण देती हैं।
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