देश की खबरें | नगालैंड लोकायुक्त दिल्ली में रहकर कैसे अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकते हैं: न्यायालय
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि नगालैंड के लोकायुक्त दिल्ली में रहते हुये किस तरह से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकते हैं। न्यायालय ने कहा कि ऐसा करके वह अपने पद की गरिमा कम कर रहे हैं।
नयी दिल्ली, 11 जनवरी उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि नगालैंड के लोकायुक्त दिल्ली में रहते हुये किस तरह से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकते हैं। न्यायालय ने कहा कि ऐसा करके वह अपने पद की गरिमा कम कर रहे हैं।
प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब राज्य के अधिवक्ता ने दावा किया कि लोकायुक्त ‘ईमानदारी’ से अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर रहे हैं और वह दिल्ली से काम करना चाहते हैं।
लोकायुक्त की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि राज्य सरकार उन्हें हटाना चाहती है लेकिन लोकायुक्त को पद से हटाने के लिये प्रक्रिया है जिसका पालन करना जरूरी है।
पीठ ने कहा, ‘‘हम आपसे (सिंह) सहमत नही हैं। हम यह समझ नहीं पा रहे हैं। महामारी का समय होने की वजह से कैसे एक व्यक्ति दिल्ली में बैठे हुये लोकायुक्त हो सकता है। आप अपने पद की गरिमा कम कर रहे हैं। ’’
शीर्ष अदालत नगालैंड में लोकायुक्त के कामकाज पर सवाल उठाने वाली राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। मेघालय उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश उमा नाथ सिंह नगालैंड के लोकायुक्त हैं।
वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के दौरान नगालैंड की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के एन बालगोपाल ने कहा कि लोकायुक्त की नियुक्ति ‘अमान्य’ है।
उन्होंने कहा, ‘‘वह दिल्ली शिफ्ट होना चाहते हैं लेकिन राज्य में अपने आवास से पांच किमी दूर कार्यालय नहीं जाना चाहते। वह कार्य संपन्न नहीं करने वाले लोकायुक्त हैं।’’
पीठ ने कुछ दस्तावेजों का जिक्र करते हुये कहा कि लोकायुक्त ने स्वयं ही कहा है कि शीर्ष अदालत को उन्हें उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश से बदल देना चाहिए।
सिंह ने कहा, ‘‘मैंने उन्हें इस तरह की सलाह नहीं दी है। मैं इस मामले में पहली बार पेश हो रहा हूं और हो सकता है कि कुछ हताशा में ऐसा किया गया हो। वे (राज्य) हमें हटाना चाहते हैं। मुझे लगा कि शीर्ष अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी। लोकायुक्त को हटाने के लिये एक निर्धारित प्रक्रिया है।’’
सिंह ने कहा कि वह इस मामले में आवश्यक निर्देश प्राप्त करके अपनी बात रखेंगे।
इस पर पीठ ने कहा कि बेहतर होगा कि वह अगले सप्ताह तक इस मामले में आवश्यक निर्देश प्राप्त करके हमें अवगत करायें।
शीर्ष अदालत पिछले साल अगस्त में राज्य सरकार की इस याचिका पर सुनवाई के लिये तैयार हो गयी थी। इस याचिका में लोकायुक्त अध्यक्ष को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
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