गुवाहाटी/कोकराझार, 21 अप्रैल गुजरात से गिरफ्तार किए गए विधायक जिग्नेश मेवानी को असम लाये जाने के कुछ ही घंटे बाद पूर्वोत्तर राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि उन्हें नहीं पता कि मेवानी कौन हैं।
हालांकि, असम की कांग्रेस इकाई को इस गिरफ्तारी के पीछे एक साजिश नजर आई और एक कथित ट्वीट को लेकर गिरफ्तार किये गये दलित नेता की मदद के लिए कानूनी विशेषज्ञों को भेज दिया।
उल्लेखनीय है मेवानी ने हाल ही में कांग्रेस को अपने समर्थन का वादा किया था।
सरमा ने एक कार्यक्रम के इतर संवाददाताओं के सवाल का जवाब देते हुए दावा किया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि मेवानी कौन हैं।
मेवानी की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने को कहे जाने पर सरमा ने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता। वह कौन हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे जानकारी नहीं है।’’
कोकराझार पुलिस थाना में भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज किये जाने के बाद मेवानी को बुधवार रात गुजरात के पालनपुर शहर से गिरफ्तार किया गया था।
उन्हें बृहस्पतिवार सुबह गुजरात से विमान के जरिये गुवाहाटी लाया गया और फिर सड़क मार्ग से कोकराझार ले जाया गया।
असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) के अध्यक्ष भूपेन बोरा ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इसमें साजिश की बू आ रही है।
मेवानी की गिरफ्तारी के तुरंत बाद उन्होंने कहा था, ‘‘पुलिस ने उस प्राथमिकी का ब्योरा नहीं दिया है जिसके आधार पर मेवानी को गिरफ्तार किया गया। मेवानी हमेशा भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ मुखर रहे हैं।’’
बोरा ने यह भी कहा कि हत्या, डकैती और अन्य अपराधों के बढ़ते मामलों के कारण असम के लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, लेकिन राज्य की पुलिस अपने नागरिकों की रक्षा करने के बजाय एक साधारण ट्वीट से निपटने पर कहीं अधिक ध्यान दे रही है।
एपीसीसी के मुख्य प्रवक्ता मंजीत महंत ने पीटीआई- को बताया कि पार्टी ने मेवानी की मदद के लिए कानूनी विशेषज्ञों की एक टीम नियुक्त की है।
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