देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने ‘ग्लैंडर्स’ बीमारी का प्रसार रोकने संबंधी याचिका पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को पेटा के उस आवदेन पर आप सरकार से जवाब मांगा जिसमें घोड़ों में होने वाली बीमारी ‘ग्लैंडर्स’ के प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए पशुओं में संक्रामक एवं संसर्गजन्य रोगों के नियंत्रण तथा रोकथाम अधिनियम, 2009 को राष्ट्रीय राजधानी में क्रियान्वित करने का आग्रह किया गया है।
नयी दिल्ली, 24 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को पेटा के उस आवदेन पर आप सरकार से जवाब मांगा जिसमें घोड़ों में होने वाली बीमारी ‘ग्लैंडर्स’ के प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए पशुओं में संक्रामक एवं संसर्गजन्य रोगों के नियंत्रण तथा रोकथाम अधिनियम, 2009 को राष्ट्रीय राजधानी में क्रियान्वित करने का आग्रह किया गया है।
न्यायमूर्ति नज्मी वजीरी ने संगठन ‘पीपुल ऑफ एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनीमल्स’ (पेटा) के आवेदन पर राष्ट्रीय राजधानी में ‘ग्लैंडर्स’ नियंत्रण एवं उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना क्रियान्वित करने तथा सभी घोड़ों, खच्चरों, टट्टुओं और गधों की तत्काल जांच कराने के मुद्दे पर भी दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया।
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अदालत मामले में अगली सुनवाई अब छह अक्टूबर को करेगी।
पेटा ने अधिवक्ताओं रोहित जैन और स्वाति सुंबली के जरिए दायर आवेदन में कहा है कि एहतियाती कदम न उठाए जाने पर ‘ग्लैंडर्स’ बीमारी घोड़ों से मनुष्यों में भी फैल सकती है और यह इंसानों के लिए घातक हो सकती है।
आवेदन में दावा किया गया है कि पशुओं में ‘ग्लैंडर्स’ बीमारी के फैलने को लेकर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र द्वारा बार-बार अलर्ट जारी किए जाने के बावजूद दिल्ली सरकार कोई एहतियाती कदम नहीं उठा रही है।
आवेदन पेटा द्वारा जनवरी में दायर लंबित उस रिट याचिका के तहत ही दायर किया गया है जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में तांगों के चलने पर रोक लगाने के लिए नगर निगमों द्वारा चार जनवरी 2020 को पारित प्रस्ताव को लागू करने का आग्रह किया गया है।
अदालत ने मुख्य याचिका पर केंद्र, दिल्ली के तीनों नगर निगमों, पुलिस और दिल्ली सरकार को फरवरी में नोटिस जारी किया था।
याचिका में दावा किया गया है कि तांगा खींचने वाले पशुओं को भीषण गर्मी और हाड़ कंपा देने वाली सर्दी तथा प्रदूषित वातावरण जैसी बेहद प्रतिकूल परिस्थितियों में काम करना पड़ता है तथा उन्हें आवश्यकता से अधिक वजन खींचना पड़ता है।
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