उच्च न्यायालय ने जमानत के लिए 60 हजार रुपये जमा करने की अदालती शर्त खारिज की
एक कथित मामले में जमानत के लिए 60 हजार रुपये का शुल्क जमा करने की
रांची, 23 अप्रैल झारखंड उच्च न्यायालय ने आबकारी शुल्क की चोरी के
एक कथित मामले में जमानत के लिए 60 हजार रुपये का शुल्क जमा करने की
निचली अदालत द्वारा लगायी गयी शर्त बृहस्पतिवार को खारिज कर दी।
अदालत ने कहा कि जब तक किसी मामले में अपराध साबित नहीं हो जाता है और आरोपी अपराधी नहीं साबित हो जाये उसे किसी भी प्रकार की सजा नहीं दी जा सकती है।
झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश आनन्द सेन ने रांची के न्यायायुक्त
द्वारा इस वर्ष 14 जनवरी को इस सिलसिले में दिये गये आदेश के उस हिस्से
को खारिज कर दिया जिसमें जमानत के लिए 60 हजार रुपये का शुल्क आबकारी
विभाग में जमा कराने का निर्देश दिया गया था।
याचिकाकर्ता पर 106 लीटर देसी और विदेशी शराब अपनी दूकान में अवैध ढंग
से रखने का आरोप है जिसकी बरामदगी आबकारी विभाग ने अपनी छापेमारी में की
थी।
याचिकाकर्ता ने रांची के न्यायायुक्त की अदालत में नियमित जमानत के
लिए जब याचिका दायर की तो सुनवाई के दौरान न्यायायुक्त ने उसे जमानत देने
के लिए साठ हजार रुपये का शुल्क जमा करने की शर्त रखी थी जिसे बृहस्पतिवार को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया।
न्यायालय ने जमानत के लिए इस प्रकार शुल्क जमा करने के निर्देश को एक
तरह का दंड बताया और कहा कि अपराध साबित हुए बिना अदालत किसी को दंडित
नहीं कर सकती है।
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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 23, 2020 06:20 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

