विदेश की खबरें | प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत के साथ मजबूत संबंधों के पैरोकार थे हेनरी किसिंजर
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

वाशिंगटन, 30 नवंबर अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर का बुधवार को निधन हो गया। वह 100 वर्ष के थे। उन्हें 1970 के दशक में भारतीय नेतृत्व के प्रति उनकी उपेक्षा और उदासीनता के लिए जाना जाता है। यहां तक कि उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लिए नस्लीय और असंसदीय शब्दों तक का इस्तेमाल किया था।

अक्टूबर 1974 में भारत की पहली यात्रा से लेकर मार्च 2012 में भारत की यात्रा के बीच उन्होंने वैश्विक मंच पर हिंदुस्तान के बढ़ते कद को पहचान लिया था और वह पिछले एक दशक से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अमेरिका और भारत के मजबूत संबंधों की वकालत कर रहे थे।

सत्तर के दशक की शुरुआत से अमेरिका-चीन संबंधों को आकार देने में अहम भूमिका निभाने वाले किसिंजर का बुधवार को कनेक्टिकट में उनके आवास पर निधन हो गया। उनकी परामर्श कंपनी ‘किसिंजर एसोसिएट्स’ ने यह जानकारी दी। हालांकि मृत्यु का कारण नहीं बताया।

भारत के साथ उनके संबंध 1970 के दशक में तनावपूर्ण हो गए थे जब वह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और विदेश मंत्री के रूप में तत्कालीन अमेरिकी प्रशासन में थे। लेकिन चीन की ओर रुख करने से पहले उनकी पहली प्राथमिकता भारत को लेकर थी।

सितंबर 2020 में ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने व्हाइट हाउस टेप के गोपनीयता के दायरे से बाहर किए गए तत्कालीन नए भंडार पर आधारित एक लेख प्रकाशित किया जिसमें 1970 के दशक में तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार किसिंजर द्वारा अपनाए गए “पक्षपातपूर्ण रवैये के चौंकाने वाले सबूत” प्रदान किए गए थे।

टेप के अंश में बताया गया है कि निक्सन के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए किसिंजर ने कैसे उन्हें समझाया : “वे (भारतीय) बहुत मंझे हुए चापलूस हैं, राष्ट्रपति महोदय। ये चापलूसी में माहिर होते हैं। वे गूढ़ चापलूसी में माहिर होते हैं। इसी तरह वे 600 वर्षों तक जीवित रहे। वे जी हुजूरी करते हैं - उनकी सबसे बड़ी खूबी महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों की खुशामद करना है।”

सार्वजनिक किए गए टेपों के आधार पर निक्सन-किसिंजर जोड़ी के बीच इस तरह के आदान-प्रदान का विवरण देते हुए, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रोफेसर गैरी जे. बैस ने बताया कि इन टेपों की पूरी सामग्री से पता चलता है कि कैसे “निक्सन के नेतृत्व में अमेरिकी नीति दक्षिण एशिया और भारतीयों के प्रति उनकी नफरत से प्रभावित थी।”

बैस ने कहा, “दशकों से निक्सन और किसिंजर ने खुद को वास्तविक राजनीति के प्रतिभाशाली खिलाड़ी के रूप में चित्रित किया है, एक ऐसी विदेश नीति चलायी है जो निष्पक्ष रूप से अमेरिका के हितों की सेवा करती है। लेकिन ये सार्वजनिक किए गए व्हाइट हाउस टेप एक बिल्कुल अलग तस्वीर दिखाते हैं: उच्चतम स्तर पर नस्लवाद और स्त्री द्वेष, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा के हास्यास्पद दावों के पीछे दशकों तक छिपाया जाता रहा। निक्सन और किसिंजर के निष्पक्ष ऐतिहासिक मूल्यांकन की जब बात आती है तो इसमें पूर्ण सत्यता और स्पष्टता को शामिल किया जाना चाहिए।”

वाशिंगटन में निक्सन, किसिंजर और राष्ट्रपति के चीफ ऑफ स्टाफ के बीच 5 नवंबर, 1971 को हुई बातचीत के सार्वजनिक टेप से पता चला कि निक्सन और किसिंजर दोनों ने बार-बार इंदिरा गांधी के लिये एक खास अपशब्द का इस्तेमाल किया।

मार्च 2012 में एक मीडिया कॉन्क्लेव में भारत में इस मुद्दे पर किसिंजर ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए असंसदीय के अपने इस्तेमाल का बचाव करते हुए कहा, “मैं दबाव में था और मैंने आवेश में आकर ये टिप्पणियां कर दीं। लोगों ने उन टिप्पणियों को संदर्भ से बाहर करके देखा।”

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