देश की खबरें | गुलशन कुमार हत्याकांड: अदालत ने निर्माता रमेश तौरानी को बरी करने का फैसला बरकरार रखा

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मुंबई, एक जुलाई बंबई उच्च न्यायालय ने 1997 में हुई संगीत दिग्गज गुलशन कुमार की हत्या के मामले में फिल्म निर्माता एवं ‘टिप्स इंडस्ट्रीज’ के सह-संस्थापक रमेश तौरानी को बरी करने का निचली अदालत का फैसला बृहस्पतिवार को बरकरार रखा। न्यायालय ने इसके साथ ही इस हत्याकांड में अब्दुल रऊफ मर्चेंट को दोषी ठहराने और उसे आजीवन कारावास की सजा देने के अदालत के फैसले की भी पुष्टि की।

न्यायमूर्ति एसएस जाधव और न्यायमूर्ति एनआर बोरकर की एक खंडपीठ ने मामले में अन्य आरोपी रऊफ के भाई अब्दुल राशिद मर्चेंट को बरी किए जाने का निचली अदालत का फैसला निरस्त कर दिया। पीठ ने इस मामले में मर्चेंट को भी दोषी ठहराते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

'कैसेट किंग' के नाम से मशहूर गुलशान कुमार की अगस्त 1997 में उपनगर अंधेरी में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उनके प्रतिद्वंद्वियों ने उन्हें रास्ते से हटाने के लिए गैंगस्टर अबू सलेम को पैसे दिए थे।

सत्र अदालत ने 29 अप्रैल 2022 को 19 में से 18 आरोपियों को बरी कर दिया था। निचली अदातल ने अब्दुल रऊफ मर्चेंट को भादंस की धारा 302, 307, 120(बी), 392 तथा 397 और भारतीय शस्त्र अधिनियम की धारा 27 के तहत के दोषी ठहराया था। रऊफ ने दोषी ठहराए जाने के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी, जबकि राज्य सरकार ने तौरानी को बरी किए जाने के खिलाफ अपील दायर की थी।

उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी और तौरानी को बरी करने का फैसला बरकरार रखा। पीठ ने, हालांकि, रऊफ की दोषसिद्धि और उसे सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा, लेकिन धारा 392 और 397 के तहत उसकी सजा को रद्द कर दिया।

पीठ ने आदेश में कहा, ‘‘ अब्दुल राशिद मर्चेंट को बरी किए जाने के फैसले को रद्द किया जाता है। राशिद को भादंसं की धारा 302 और भारतीय शस्त्र अधिनियम की धारा 27 के तहत दोषी ठहराया जाता है और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाती है। उसे डीएन नगर थाने में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया जाता है।’’

पीठ ने यह भी कहा कि अब्दुल रऊफ मर्चेंट मुकदमे के दौरान अपने आचरण के चलते किसी छूट का हकदार नहीं है। इसने कहा, ‘‘ अपीलकर्ता रऊफ उसके आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए छूट का हकदार नहीं होगा और बड़े पैमाने पर न्याय तथा जनता के हित में, वह किसी भी उदारता का हकदार नहीं है।’’

अदालत ने कहा कि हत्या के बाद रऊफ फरार हो गया था और उसे 2001 में गिरफ्तार किया गया था।

पीठ ने कहा, ‘‘ 2009 में रऊफ को ‘फर्लो’ दिया गया, लेकिन उसके बाद उसने आत्मसमर्पण नहीं किया और 2016 में उसे फिर गिरफ्तार किया गया।’’

अदालत ने कहा कि राशिद ने अगर आत्मसमर्पण नहीं किया, तो सत्र अदालत उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करेगी।

निहारिका अनूप

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