देश की खबरें | हरित अधिकरण ने अवैध निर्माण ढहाने के आदेश पर पुनर्विचार करने संबंधी याचिका खारिज की

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नयी दिल्ली,12अप्रैल राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने दक्षिण दिल्ली के जौनपुर और डेरा मंडी वन इलाके में हुए अवैध निर्माण को ढहाने के अपने आदेश पर पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है।

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायाधीश ए के गोयल की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि अतिक्रमण को ढहाने संबंधी निर्देश वापस नहीं लिए जा सकते क्योंकि वहां अतिक्रमण है या नहीं इस मुद्दे पर अभी वैधानिक प्राधिकारों को कोई निर्णय लेना है।

पीठ ने कहा,‘‘ चूंकि अधिकरण ने व्यक्तिगत मुद्दों के समाधान की प्रक्रिया शुरू नहीं की है और वैधानिक प्राधिकारों को केवल कानून के आदेश का पालन करने का निर्देश किया है,ऐसे में अगर आवेदनकर्ता असंतुष्ट हैं तो वे उन आदेशों के खिलाफ उचित वैधानिक उपाय करने के लिए स्वतंत्र हैं, जिसे वह असंतुष्ट हैं।’’

एनजीटी ने पूर्व में दिल्ली सरकार को राष्ट्रीय राजधानी के जौनपुर और डेरा मंडी वन इलाके में किए गए अवैध निर्माण को ढहाने का आदेश दिया था और कहा था कि अतिक्रमण को मंजूरी दे कर वन कानून को पराजित नहीं किया जा सकता।

अधिकरण ने इस प्रतिवेदन पर गौर किया कि 18 अगस्त 2020 को प्रस्तावित ढहाने का काम नहीं किया जा सका क्यों पुलिस बल मौजूद नहीं था जबकि उन्हें ढहाने की कार्रवाई वाले दिन पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात करने की जानकारी पहले ही दे दी गई थी।

पीठ ने कहा,‘‘ यह सच है कि इस प्रकार के अतिक्रमण को ढहाना एक चुनौती है, लेकिन अगर कानून के नियम को लागू नहीं किया जाएगा तो हमारा समाज कानून व्यवस्था विहीन हो जाएगा। अतिक्रमण को मंजूरी दे कर वन कानून को पराजित नहीं किया जा सकता .....।’’

गौरतलब है कि दक्षिण जिले के उपायुक्त ने एक स्थिति रिपोर्ट पेश की थी जिसमें कहा गया था कि करीब पांच हजार अतिक्रमणकर्ता हैं और वक्त के साथ वहां 750-800 अवैध ढांचों का निर्माण किया गया है साथ ही तीन हजार अतिक्रमणकारी दूसरे शिविर में रह रहे हैं।

अधिकरण दक्षिण दिल्ली निवासी अमरजीत सिंह नलवा की याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

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