देश की खबरें | पश्चिमी मध्यप्रदेश में हरित बिजली की लहर, 8,550 स्थानों पर लगे सौर पैनल

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मध्यप्रदेश के पश्चिमी हिस्से में सौर पैनल से बिजली बनाने वाले स्थानों की तादाद साल भर में करीब 75 प्रतिशत के बड़े उछाल के साथ 8,550 पर पहुंच गई है जहां कुल 110 मेगावॉट क्षमता के संयंत्र स्थापित किए गए हैं। मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

इंदौर, 13 जून मध्यप्रदेश के पश्चिमी हिस्से में सौर पैनल से बिजली बनाने वाले स्थानों की तादाद साल भर में करीब 75 प्रतिशत के बड़े उछाल के साथ 8,550 पर पहुंच गई है जहां कुल 110 मेगावॉट क्षमता के संयंत्र स्थापित किए गए हैं। मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

प्रवक्ता ने बताया कि पिछले साल मई-जून के दौरान पश्चिमी मध्यप्रदेश के 15 जिलों में 4,900 स्थानों पर सौर पैनल से बिजली बनाई जा रही थी।

उन्होंने बताया कि फिलहाल इन जिलों में कुल 8,550 स्थानों पर सौर पैनल से बिजली बनाई जा रही है जिनमें नागरिकों के घरों के अलावा, अस्पताल, सरकारी कार्यालय और अन्य परिसर शामिल हैं।

प्रवक्ता ने बताया, ‘‘इन स्थानों पर कुल 110 मेगावॉट के सौर पैनल स्थापित हैं जिनसे गर्मियों के जारी मौसम में हर माह कम से कम पांच करोड़ रुपये के बाजार मूल्य की बिजली बनाई जा रही है। अधिकतर स्थानों पर सौर पैनल भवनों की छतों पर लगे हैं।’’

उन्होंने बताया कि इनमें से 59 मेगावॉट क्षमता के सौर पैनल बिजली के निम्न दाब उपभोक्ताओं के परिसरों में स्थापित हैं, जबकि उच्च दाब उपभोक्ताओं के परिसरों में 51 मेगावॉट क्षमता के सौर पैनल लगाए गए हैं।

प्रवक्ता के मुताबिक, पश्चिमी मध्यप्रदेश में सौर बिजली बनाने के मामले में इंदौर अव्वल है जहां सर्वाधिक 5,100 स्थानों पर इस तरह हरित ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार इंदौर को ‘‘सोलर सिटी’’ के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रही है।

प्रवक्ता ने बताया कि अपने परिसरों में सौर पैनल से बिजली उत्पादन करके इसे ग्रिड में भेजने की "नेट मीटरिंग प्रणाली" के कारण संबंधित उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल की रकम 30 से 60 फीसद तक घट गई है।

उन्होंने बताया कि बिजली उत्पादन के लिए छतों पर सौर पैनल लगाने के वास्ते प्रदेश सरकार उपभोक्ताओं को अनुदान देती है और ये उपकरण स्थापित करने के लिए उन्हें बैंकों से ऋण भी मिलता है।

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