ताजा खबरें | राज्यों में इंटरनेट बंद करने के विषय पर निगरानी के लिये सुदृढ़ तंत्र स्थापित करे सरकार : समिति

नयी दिल्ली, एक दिसंबर संसद की एक समिति ने सरकार से एक सुदृढ़ निगरानी तंत्र स्थापित करने का सुझाव दिया ताकि राज्य/संघ-राज्य क्षेत्र अपने क्षेत्र में इंटरनेट बंद करने के लिए अपराध दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 का सहारा न लें।

समिति ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि दूरसंचार विभाग/गृह मंत्रालय को इस बात की जानकारी नहीं है कि राज्यों ने अब तक कितनी बार सीआरपीसी की धारा 144 के तहत

इंटरनेट बंद करने का आदेश दिया है।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसद की स्थायी समिति की ‘‘दूरसंचार सेवाओं/इंटरनेट का निलंबन एवं इसके प्रभाव’’ विषय पर रिपोर्ट में यह बात कही गई है जिसे लोकसभा में बुधवार को पेश किया गया।

समिति इच्छा व्यक्त करती है कि विभाग द्वारा एक सुदृढ़ निगरानी तंत्र लाया जाना चाहिए ताकि राज्य/संघ-राज्य क्षेत्र अपने क्षेत्र में इंटरनेट बंद करने के लए सीआरपीसी की धारा 144 का सहारा न लें।

रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने जम्मू-कश्मीर में लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहने के बारे में चिंता व्यक्त की, लेकिन सरकार ने बताया कि ऐसा राष्ट्रीय सुरक्षा के कारण से किया गया था।

इसमें कहा गया है कि समिति नोट करती है कि दूरसंचार निलंबन, दूरसंचार अस्थायी सेवा निलंबन (लोक आपात या लोक सुरक्षा) नियम, 2017 के अनुसार शासित होता है। 10 नवंबर 2020 को उक्त नियम में संशोधन अधिसूचत किया गया है जिसमें यह बताया गया है कि इस नियम के तहत जारी किया गया कोई भी निलंबन आदेश पंद्रह दिन से अधिक समय तक लागू नहीं किया जाएगा ।

रिपोर्ट के अनुसार, उच्चतम न्यायालय ने 10 जनवरी, 2020 के अपने आदेश में कहा था कि प्रतिवादी राज्य/सक्षम अधिकारी इंटरनेट सहित दूरसंचार सेवाओं को निलंबित करने हेतु

वर्तमान में और भविष्य में सभी आदेश अपराध दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 के तहत जारी करें ताकि प्रभावित व्यक्ति इसे उच्च न्यायालय या उपयुक्त मंच के समक्ष चुनौती दे सके।

समिति को सूचित किया गया है कि निलंबन नियम के अनुसार दूरसंचार सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित करने के आदेश केवल संघ/राज्य के गृह सचिव द्वारा जारी किए जाते हैं।

यह पूछे जाने पर क्या दूरसंचार विभाग /गृह मंत्रालय के पास दूरसंचार/इंटरनेट निलंबन के लिए सीआरपीसी की धारा 144 का प्रयोग करने वाले राज्यों के बारे में कोई जानकारी है, इस पर विभाग ने बताया है कि ‘वे इंटरनेट शटडाउन में अपनाई गई प्रक्रिया या इससे संबंधित कोई रिकार्ड नहीं रखते हैं और इसलिए नियम के तहत इस संबंध में अधिकारियों द्वारा जारी किए गए किसी भी आदेश की जानकारी नहीं है।’

समिति ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि दूरसंचार विभाग/गृह मंत्रालय को इस बात की जानकारी नहीं है कि राज्यों ने अब तक कितनी बार सीआरपीसी की धारा 144 के तहत

इंटरनेट बंद करने का आदेश दिया है।

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