ताजा खबरें | सरकार ने 2018-19 में हुए अतिरिक्त व्यय के लिए संसद से मंजूरी लेने में देरी के आरोप को खारिज किया

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को राज्यसभा में इस बात से इंकार किया कि वित्त वर्ष 2018-19 में हुए अतिरिक्त व्यय के लिए संसदीय मंजूरी लेने में सरकार ने देरी की है।

नयी दिल्ली, 21 मार्च वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को राज्यसभा में इस बात से इंकार किया कि वित्त वर्ष 2018-19 में हुए अतिरिक्त व्यय के लिए संसदीय मंजूरी लेने में सरकार ने देरी की है।

उन्होंने वित्त वर्ष 2021-22 के अनुदान की अनुपूरक मांगों तथा वित्त वर्ष 2018- 19 के अतिरिक्त अनुदान की मांगों पर सदन में हुयी चर्चा के जवाब में यह टिप्पणी की। चर्चा के दौरान सदस्यों ने कहा था कि सरकार ने 2018- 19 के लिए अतिरिक्त अनुदान की मांगों को अब पेश किया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि यह विषय लोक लेखा समिति के पास था और उसने सरकार से कहा था कि वह इस अतिरिक्त व्यय को नियमित करने के लिए संसद से मंजूरी ले। उन्होंने कहा कि सरकार को समिति की रिपोर्ट फरवरी 2021 में मिली थी और जून 2022 तक सरकार को मंजूरी लेने के लिए समय दिया गया था।

उन्होंने कहा कि सरकार दिए गए समय से पहले ही इस अतिरिक्त व्यय को मंजूरी दिलाने का प्रयास कर रही है।

वित्त मंत्री ने 2021-22 के अनुदान की अनुपूरक मांगों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने उर्वरक सब्सिडी, नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवेलपमेंट (नाबार्ड) में पूंजी डालने के लिये अतिरिक्त कोष मांगा है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा कई कार्य उम्मीद से तेजी से हुए जिनके लिए उस समय व्यय करना जरूरी हुआ।

उन्होंने कहा कि राशि का एक बड़ा हिस्सा आम लोगों को योजनाओं का लाभ प्रदान करने के लिए किया गया था। उन्होंने कहा कि सरकार ने यूरिया की ऊंची लागत का बोझ खुद उठाया और इसका भार किसानों पर नहीं डाला।

वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्रीय करों में राज्यों का हिस्सा 2022-23 में 8.17 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है और चालू वित्त वर्ष के लिए 7.45 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान की राशि पहले ही जारी की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि अनुपूरक अनुदान मांग में सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों में पूंजी डाले जाने को लेकर 5,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है।

निर्मला सीतारमण ने कहा कि बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का मूल्यांकन वैज्ञानिक तरीके से किया गया है और इसका खुलासा सेबी के पास आईपीओ को लेकर जमा विवरण पुस्तिका में किया गया है।

उनके जवाब के बाद सदन ने संबंधित विनियोग विधेयकों को लौटा दिया। लोकसभा इन्हें पहले ही पारित कर चुकी है।

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