ताजा खबरें | राज्यसभा से विदा ले रहे विपक्षी सदस्यों को गोयल ने दी ‘पिच’ बदलने की सलाह

नयी दिल्ली, 31 मार्च राज्यसभा में सदन के नेता एवं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार को उच्च सदन से सेवानिवृत्त हो रहे विपक्षी सदस्यों को राजनीतिक ‘‘पिच’’ बदलने की सलाह देते हुए कहा कि ऐसी मंशा रखने वालों के लिए नए अवसर उपलब्ध हैं।

राज्यसभा में 19 राज्यों के विभिन्न दलों के 72 सदस्यों को आज विदाई दी गई। इनमें आनंद शर्मा और कपिल सिब्बल सहित कांग्रेस के 13 सदस्य शामिल हैं। इनमें से कई सदस्य कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के समूह जी-23 में शामिल हैं, जो पार्टी नेतृत्व की आलोचना करते रहे हैं।

सेवानिवृत्त हो रहे सदस्यों के विदाई भाषण में गोयल ने कहा कि सदस्यों के कार्यकाल का समाप्त होना राजनीतिक पारी का एक पड़ाव भर है।

उन्होंने इन सांसदों को सलाह भी दी कि कि वे चाहें तो अपनी पिच बदल सकते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘टेस्ट मैच लंबा है, हम सब खेलते रहेंगे। कोई उसी पिच पर खेलता है तो कुछ को मौका मिलता है पिच बदलने का। कई लोगों को अभी भी आमंत्रण है पिच बदलने का। पिच बदलना चाहें तो नए अवसर उपलब्ध हैं। मिल-जुल कर हम सब काम करें।’’

गोयल की यह सलाह ऐसे समय में काफी महत्वपूर्ण हो सकती है जबकि जी-23 समूह के कई कांग्रेसी नेताओं के उच्च सदन में फिलहाल वापसी के आसार स्पष्ट नहीं है।

गोयल ने अपने संबोधन के दौरान यह भी कहा कि सदन में बहस और नोकझोंक के दौरान उनके आचरण से किसी को ठेस पहुंची हो तो वह उसके लिए क्षमा चाहेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘अच्छी बहस और अच्छी मित्रता में थोड़ी बहुत नोकझोंक भी होती है तो... यह इतना बुरा नहीं है।’’

गोयल ने कहा कि आज सेवानिवृत्त हो रहे सदस्यों ने अलग-अलग तरीके से सदन की गरिमा को बढ़ाने में योगदान दिया और अपनी छाप छोड़ी है, जिसे याद रखा जाएगा।

गोयल ने याद किया कि उच्च सदन के सदस्य के रूप में वह जब पहली बार भाषण दे रहे थे तक भाजपा के तत्कालीन वरिष्ठ नेता वेंकैया नायडू (वर्तमान सभापति) और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी ने उनका उत्साहवर्धन किया था।

उन्होंने कहा, ‘‘जब सदस्य पूरी तैयार के साथ सदन में अपना पक्ष रखते हैं और जनता के हित में काम करते हैं तो मैं समझता हूं कि वास्तव में उच्च सदन की गरिमा और बढ़ेगी। साथ ही देश का भी विश्वास हम सभी पर बढ़ेगा।’’

ज्ञात हो कि सेवानिवृत्त हो रहे सांसदों में गोयल भी शामिल हैं।

राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने अपने संबोधन में यूं तो सभी विपक्षी नेताओं के कार्यकाल की सराहना की लेकिन उन्होंने गृह मंत्रालय संबंधी संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में आनंद शर्मा का विशेष उल्लेख किया और उनके कामकाज की सराहना की।

हालांकि आनंद शर्मा ने अपने संबोधन में इस बात पर अफसोस जताया कि बदलते दौर में राजनीतिक जीवन में विरोधियों को शत्रु के तौर पर देखा जाने लगता है और कटुता बढ़ने लगती है। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र के लिए जरूरी है कि राष्ट्रीय दल मजबूत रहें और अन्य दल भी पनपें। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भगवान का रथ भी एक पहिये से नहीं चल सकता, उसी प्रकार प्रजातंत्र के लिए भी सत्तापक्ष एवं विपक्ष रूपी दोनों पहियों का होना जरूरी है।

अप्रैल में सेवानिवृत्त हो रहे सदस्यों में शर्मा और गोयल के अलावा ए. के. एंटनी, भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी, एम. सी. मैरी कॉम और स्वप्न दासगुप्ता शामिल हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, सुरेश प्रभु, एम. जे अकबर, जयराम रमेश, विवेक तन्खा, वी. विजयसाई रेड्डी का कार्यकाल जून में समाप्त होगा।

जुलाई में सेवानिवृत्त होने वाले सदस्यों में पीयूष गोयल, मुख्तार अब्बास नकवी, पी. चिदंबरम, अंबिका सोनी, कपिल सिब्बल, सतीश चंद्र मिश्रा, संजय राउत, प्रफुल्ल पटेल और के. जे. अल्फोंस शामिल हैं।

कुछ केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा नेताओं को फिर से नामित किया जाएगा वहीं कांग्रेस के कुछ सदस्यों को पुन: नामित किए जाने पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

ब्रजेन्द्र

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