देश की खबरें | वैश्विक महासागर संधि जल्द से जल्द लागू होनी चाहिए: भारत, फ्रांस ने कहा
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नयी दिल्ली, 12 फरवरी भारत और फ्रांस ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर के क्षेत्रों में समुद्री जैव विविधता के संरक्षण और सतत उपयोग के लिए एक वैश्विक समझौते उच्च समुद्र संधि (वैश्विक महासागर संधि) को जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए।
पेरिस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जून में नीस में आयोजित होने वाले संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन (यूएनओसी-3) के लिए फ्रांस को भारत के समर्थन की पेशकश भी की।
उन्होंने कहा कि यूएनओसी-3 महासागरों के संरक्षण और सतत उपयोग के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
एक संयुक्त बयान के अनुसार, ‘‘फ्रांस और भारत प्राकृतिक अधिकार क्षेत्र से परे समुद्री जैव विविधता के संरक्षण और सतत उपयोग पर समझौते (बीबीएनजे समझौता) के महत्व को समावेशी और समग्र अंतरराष्ट्रीय महासागर के स्तंभों में से एक के रूप में मानते हैं।’’
इसके अनुसार दोनों देशों ने पहले ही संधि पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और कहा है कि इसे जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए।
‘‘उच्च समुद्र’’, जिसे ‘‘अंतरराष्ट्रीय जल’’ भी कहा जाता है, किसी भी देश के राष्ट्रीय जल, विशेष आर्थिक क्षेत्र और अधिकार क्षेत्र से परे के क्षेत्रों को संदर्भित करता है। इन जल क्षेत्रों पर किसी एक देश का नियंत्रण नहीं है तथा सभी देशों को बिना किसी हस्तक्षेप के नौवहन, मछली पकड़ने, अनुसंधान और अन्य गतिविधियों के लिए इनका उपयोग करने का अधिकार है।
महासागर का 60 प्रतिशत से अधिक भाग हालांकि खुले समुद्र में फैला हुआ है और वर्तमान में केवल 1.2 प्रतिशत ही संरक्षित है।
भारत और फ्रांस ने जलवायु परिवर्तन समेत पर्यावरणीय संकटों और चुनौतियों का मिलकर समाधान करने तथा टिकाऊ जीवन शैली को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की।
मोदी और मैक्रों दोनों ने लोगों और ग्रह के लिए पेरिस समझौते के सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने भारत-फ्रांस हिंद-प्रशांत त्रिकोणीय विकास सहयोग की शुरुआत का भी स्वागत किया, जिसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र के तीसरे देशों में जलवायु और सतत विकास लक्ष्य केंद्रित परियोजनाओं को समर्थन देना है।
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