विदेश की खबरें | जी-7 देशों ने यूक्रेन के साथ सुरक्षा समझौते का संकल्प लिया, नाटो की सदस्यता की राह साफ नहीं
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

बुधवार को उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) का शिखर सम्मेलन संपन्न हो गया, लेकिन यूक्रेन को इसकी सदस्यता देने के लिए कोई स्पष्ट रुख देखने को नहीं मिला।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और जी-7 समूह के अन्य नेताओं के साथ मौजूद जेलेंस्की ने कहा, ‘‘यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल...यूक्रेन, हमारे लोगों, हमारे बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा जीत साथ लेकर जा रहा है।’’

यूक्रेन को उसकी सैन्य शक्ति को मजबूती प्रदान करने में मदद करने के लिए समझौते पर बातचीत के वास्ते जी-7 का एक संयुक्त घोषणापत्र बुनियाद तैयार करता है।

जेलेंस्की ने इस पहल को नाटो की सदस्यता के लिए एक सेतु और रूस के खिलाफ एक प्रतिरोध बताया।

बाइडन ने कहा, ‘‘हमारा सहयोग भविष्य में लंबे समय तक रहेगा। हम यूक्रेन को एक मजबूत, सक्षम सैन्य शक्ति तैयार करने में मदद करने जा रहे हैं।’’

नाटो के नेताओं द्वारा यूक्रेन के साथ संबंधों को प्रगाढ़ करने के लिए एक नया मंच स्थापित करने के बीच यह घोषणा की गई।

उन्होंने रूस का मुकाबला करने के लिए यूक्रेन को अधिक सैन्य सहायता उपलब्ध कराने का वादा करने के बाद यह कदम उठाया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और उनके नाटो के समकक्षों ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ नव नाटो-यूक्रेन परिषद में बैठक की। यह एक स्थायी इकाई है जहां 31 सहयोगी देश और यूक्रेन विचार-विमर्श कर सकते हैं और आपात स्थिति में बैठकें कर सकते हैं।

यूक्रेन को सैन्य गठबंधन में शामिल किये बगैर इसके करीब लाने की नाटो की कोशिश के तहत यह व्यवस्था की गई है। मंगलवार को नेताओं ने शिखर सम्मेलन के निष्कर्षों पर अपने बयान में कहा कि जब सहयोगी देश राजी हो जाएंगे और शर्तें पूरी की जाएंगी तब यूक्रेन को (नाटो में) शामिल किया जा सकता है।

नाटो महासचिव जेंस स्टोल्टेनबर्ग ने बुधवार को जेलेंस्की के साथ संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘आज हमने बराबरी के स्तर पर बैठक की। मैं उस दिन को लेकर आशावादी हूं जब हम सहयोगी के तौर पर बैठक करेंगे।’’

जेलेंस्की ने कहा, ‘‘शिखर सम्मेलन के नतीजे अच्छे हैं, लेकिन यदि न्योता मिलता है तो यह एक आदर्श स्थिति होगी।’’

अपनी निराशा के बावजूद यूक्रेनी नेता मंगलवार की तुलना में बुधवार को अधिक आश्वस्त नजर आये। मंगलवार को उन्होंने सदस्यता की समय सीमा तय नहीं किये जाने की आलोचना की थी।

उन्होंने कहा, ‘‘नाटो को हमारी उसी तरह से जरूरत है जैसे हमें नाटो की है।’’

बेल्जियम के प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर डी क्रू ने बुधवार को कहा, ‘‘हमें इस युद्ध से बाहर रहना होगा लेकिन यूक्रेन को सहयोग करने में सक्षम रहेंगे।’’

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