विदेश की खबरें | फ्रांसीसी परमाणु प्रतिरोध के जरिए यूरोप की सुरक्षा पर सहयोगियों के साथ विचार-विमर्श करेंगे: मैक्रों
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. परमाणु प्रतिरोध सिद्धांत के अनुसार परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्रों पर हमला नहीं किया जाना चाहिए, विशेष रूप से परमाणु हमला क्योंकि जवाबी परमाणु हमले की आशंका भी बेहद अधिक होती है।
परमाणु प्रतिरोध सिद्धांत के अनुसार परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्रों पर हमला नहीं किया जाना चाहिए, विशेष रूप से परमाणु हमला क्योंकि जवाबी परमाणु हमले की आशंका भी बेहद अधिक होती है।
फ्रांस यूरोपीय संघ का एकमात्र परमाणु शक्ति संपन्न देश है।
मैक्रों ने बृहस्पतिवार को एक विशेष यूरोपीय शिखर सम्मेलन से पहले टेलीविज़न पर अपने संबोधन में रूस को "फ्रांस और यूरोप के लिए खतरा" करार दिया।
साथ ही मैक्रों ने कहा कि उन्होंने ,‘‘हमारी (परमाणु प्रतिरोध) क्षमता के जरिए यूरोपीय महाद्वीप के हमारे सहयोगियों की सुरक्षा पर रणनीतिक बहस शुरू करने का निर्णय लिया है।’’
उन्होंने कहा कि फ्रांस के परमाणु हथियारों का इस्तेमाल केवल फ्रांसीसी राष्ट्रपति के हाथों में रहेगा।
मैक्रों का यह कदम जर्मनी में हाल में हुए चुनाव में विजेता रहे फ्रेडरिक मर्ज़ की उस पहल के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने फ्रांस के साथ "परमाणु साझेदारी" पर चर्चा का आह्वान किया था।
यूरोपीय संघ के नेता बृहस्पतिवार को ब्रुसेल्स में होने वाले शिखर सम्मेलन के दौरान अन्य विषयों के साथ-साथ परमाणु प्रतिरोध के मुद्दे पर भी चर्चा करेंगे।
मैक्रों ने कहा, ‘‘यूरोप का भविष्य वाशिंगटन या मॉस्को में तय नहीं होना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि रूस अब अपने बजट का 40 प्रतिशत हिस्सा सैन्य खर्च के लिए रख रहा है और 2030 तक 300,000 अतिरिक्त सैनिकों, 3,000 टैंकों और 300 जेट लड़ाकू विमानों के साथ अपनी सेना का विस्तार करने की योजना बना रहा है।
मैक्रों ने सवाल किया, ‘‘कौन विश्वास कर सकता है कि आज का रूस, यूक्रेन पर रुक जाएगा?’’ फ्रांस के नेता ने कहा कि सहयोगियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि संभावित शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद रूस फिर से यूक्रेन पर आक्रमण न करे।
उन्होंने कहा कि इसका मतलब "यूक्रेनी सेना को दीर्घकालिक समर्थन" प्रदान करना और संभवतः यूरोपीय सेना को तैनात करना है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूरोप पर दबाव डाला है कि वह महाद्वीप की सुरक्षा का ज्यादा से ज्यादा भार खुद उठाए। ट्रम्प प्रशासन के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अमेरिका हमेशा इसमें मौजूदा स्तर पर शामिल नहीं रहेगा।
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