देश की खबरें | विदेश सचिव मिस्री करेंगे भूटान की दो दिवसीय यात्रा, पदभार संभलने के बाद पहला विदेश दौरा
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नयी दिल्ली, 18 जुलाई विदेश सचिव विक्रम मिस्री शुक्रवार को भूटान की दो दिवसीय यात्रा पर जाएंगे। कार्यभार संभालने के बाद मिस्री की यह पहली विदेश यात्रा होगी।
विदेश मंत्रालय ने मिस्री की भूटान यात्रा की घोषणा की और कहा कि मिस्री भूटान की राजधानी थिंपू में प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे, विदेश मंत्री डीएन धुंग्येल और विदेश सचिव पेमा चोडेन आदि से मुलाकात करेंगे।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेश सचिव की यह यात्रा भारत सरकार की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति को दी जाने वाली ‘‘सर्वोच्च प्राथमिकता’’ प्रदर्शित करती है।
मिस्री भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक से भी मुलाकात करेंगे।
यात्रा की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि मिस्री और भूटान के विदेश सचिव के बीच बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की जाएगी जिसमें आपसी सुरक्षा हितों से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘विदेश सचिव विक्रम मिस्री 19-20 जुलाई को भूटान की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। यह विदेश सचिव का पदभार संभालने के बाद उनकी पहली विदेश यात्रा होगी।’’
मंत्रालय ने कहा, ‘‘यात्रा के दौरान विदेश सचिव मिस्री भूटान नरेश से मुलाकात करेंगे। वह प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री, बाह्य व्यापार मंत्री से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वह विदेश सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से भी मिलेंगे।’’
विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों विदेश सचिव भारत-भूटान विकास सहयोग वार्ता की सह-अध्यक्षता भी करेंगे।
एक बयान में कहा गया है, ‘‘ यह यात्रा भारत और भूटान के बीच नियमित उच्च स्तरीय बातचीत की परंपरा के अनुरूप है और भारत सरकार की ‘पड़ोसी पहले’ नीति को दी जाने वाली ‘सर्वोच्च प्राथमिकता’ को प्रदर्शित करती है।’’
पिछले महीने भूटान के प्रधानमंत्री नयी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे।
मिस्री की थिंपू यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब चीन और भूटान अपने सीमा विवाद के शीघ्र समाधान पर ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं, जिसका प्रभाव भारत के सुरक्षा हितों पर पड़ सकता है।
भूटान के तत्कालीन विदेश मंत्री टांडी दोरजी ने लगभग 10 माह पहले चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ बीजिंग में बातचीत की थी।
चीन की ओर से इस बातचीत के बारे में जारी बयान में कहा गया था कि भूटान एक-चीन सिद्धांत का दृढ़ता से पालन करता है और सीमा मुद्दे के शीघ्र समाधान के लिए चीन के साथ काम करने को तैयार है।
भूटान और चीन के बीच सीमा विवाद पर जारी बातचीत पर भारत नजर रख रहा है क्योंकि इसका नयी दिल्ली के सुरक्षा हितों पर प्रभाव पड़ सकता है, विशेष रूप से डोकलाम पर।
पिछले वर्ष अगस्त में चीन और भूटान ने अपने सीमा विवाद को सुलझाने के लिए ‘‘तीन-चरणीय रोडमैप’’ पर हस्ताक्षर किए थे।
इस समझौते पर हस्ताक्षर डोकलाम त्रि-जंक्शन पर भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच 73 दिनों तक चले गतिरोध के चार वर्ष बाद हुए हैं। गतिरोध तब प्रारंभ हुआ जब चीन ने उस क्षेत्र में सड़क का विस्तार करने का प्रयास किया था जिस पर भूटान अपना दावा करता है।
डोकलाम पठार पर 2017 में भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच हुए गतिरोध के चलते दोनों पड़ोसियों के बीच बड़े संघर्ष की आशंका होने लगी थी। भूटान ने कहा था कि यह क्षेत्र उसका है और भारत भूटान के दावे का समर्थन करता है।
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