पहली बार, एकल न्यायाधीशों की शीर्ष न्यायालय की तीन पीठों ने 20-20 मामलों की सुनवाई की

न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी, न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति रिषिकेश रॉय की एकल न्यायाधीशों वाली तीन पीठों ने 20-20 हस्तांतरण मामलों (वे याचिकाएं जिनमें एक मामले को एक अदालत से दूसरी अदालत में भेजने का अनुरोध किया जाता है) की वीडियो कांफ्रेंस के जरिये सुनवाई की और आवश्यक आदेश जारी किये।

जमात

नयी दिल्ली, 13 मई उच्चतम न्यायालय के इतिहास में पहली बार बुधवार को एकल न्यायाधीशों की तीन पीठों ने 20-20 मामलों की सुनवाई की और आदेश जारी किये।

न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी, न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति रिषिकेश रॉय की एकल न्यायाधीशों वाली तीन पीठों ने 20-20 हस्तांतरण मामलों (वे याचिकाएं जिनमें एक मामले को एक अदालत से दूसरी अदालत में भेजने का अनुरोध किया जाता है) की वीडियो कांफ्रेंस के जरिये सुनवाई की और आवश्यक आदेश जारी किये।

शीर्ष न्यायालय में अभी 32 न्यायाधीश है, जबकि इनके कुल 34 पद मंजूर हैं।

उल्लेखनीय है कि शीर्ष न्यायालय में न्यायाधीश संविधान पीठ को छोड़ कर आमतौर पर दो या तीन सदस्यीय पीठ के सदस्य होते हैं।

शीर्ष न्यायालय ने मामलों के काफी संख्या में लंबित होने के मद्देनजर उच्चतम न्यायालय नियमावली, 2013 में पिछले साल सितंबर में कुछ खास संशोधन किये थे, जिनमें कहा गया था कि एकल न्यायाधीश पीठ सात साल तक की कैद के अपराध वाले मामलों में जमानत और अग्रिम जमानत के मामलों में अपीलों की सुनवाई करेगी।

उच्चतम न्यायालय ने 11 मई को एक नोटिस जारी कर कहा था कि बुधवार से हस्तांतरण याचिकाओं, सात साल तक की कैद वाले अपराध के मामले में जमानत या अग्रिम जमानत की अपील के मामलों के निपटारे के लिये एक या एक से अधिक न्यायाधीशों की पीठ बैठेगी।

शीर्ष न्यायालय द्वारा अपनी वेबसाइट पर जारी एक नोटिस के मुताबिक, अन्य संशोधनों के अलावा सक्षम प्राधिकार को विषयों की कुछ खास श्रेणियां भी मुहैया की गई हैं, जिनका निपटारा प्रधान न्यायाधीश द्वारा नामित एक न्यायाधीश करेंगे।

इसमें भी यह भी कहा गया कि एकल न्यायाधीश आपराधिक दंड संहिता (सीआरपीसी) की धारा 406 के तहत मामलों के हस्तांतरण की अर्जी की भी सुनवाई करेंगे। साथ ही, दीवानी प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) की धारा 25 के तहत मामलों के हस्तांतरण के लिये फौरी प्रकृति वाली अर्जी की भी सुनवाई की जाएगी।

नोटिस में कहा गया है, ‘‘...उपरोक्त उल्लेखित विषयों को एकल न्यायाधीशों के समक्ष 13 मई 2020 से सूचीबद्ध किया जाए।’’

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