देश की खबरें | एफसीआरए: उद्देश्य और कारण का विवरण स्पष्ट करता है, वार्षिक प्रवाह 2010-19 के बीच दोगुना हुआ
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि विदेशी चंदा (विनियमन) संशोधन कानून (एफसीआरए), 2020 के उद्देश्य और कारण का विवरण, यह स्पष्ट करता है कि विदेशी चंदा का वार्षिक प्रवाह 2010 और 2019 के बीच लगभग दोगुना हो गया था और कई प्राप्तकर्ताओं ने उसका उपयोग उन उद्देश्यों के लिए नहीं किया, जिसके लिए वे पंजीकृत थे।
नयी दिल्ली, आठ अप्रैल उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि विदेशी चंदा (विनियमन) संशोधन कानून (एफसीआरए), 2020 के उद्देश्य और कारण का विवरण, यह स्पष्ट करता है कि विदेशी चंदा का वार्षिक प्रवाह 2010 और 2019 के बीच लगभग दोगुना हो गया था और कई प्राप्तकर्ताओं ने उसका उपयोग उन उद्देश्यों के लिए नहीं किया, जिसके लिए वे पंजीकृत थे।
शीर्ष अदालत ने कहा कि कई (चंदा) प्राप्तकर्ता वैधानिक अनुपालन करने में विफल रहे, जिसके परिणामस्वरूप निर्धारित अवधि के दौरान संबंधित व्यक्तियों या संगठनों के 19,000 प्रमाणपत्र रद्द कर दिए गए।
न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति सी टी रविकुमार की पीठ ने कहा कि पिछले साल दिसंबर तक, कथित तौर पर 22,762 एफसीआरए पंजीकृत संगठन थे, जो संभवत: नयी व्यवस्था के अनुरूप थे।
पीठ ने यह भी कहा कि 30 सितंबर, 2020 और पिछले साल 31 दिसंबर के बीच 12,989 संगठनों ने एफसीआरए लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए आवेदन किया है।
शीर्ष अदालत ने विदेशी चंदा (विनियमन) कानून (एफसीआरए), 2010 के प्रावधानों में कुछ संशोधनों की वैधता को बरकरार रखा जो सितंबर 2020 में लागू हुए थे।
उच्चतम न्यायालय ने 132 पृष्ठों का यह फैसला एफसीआरए 2010 के प्रावधानों में संशोधन की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिया, जो 29 सितंबर, 2020 को लागू हुआ था।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)