देश की खबरें | हर साल अक्टूबर में उम्मीद करते कि नोबेल समिति विद्या के लिए पुरस्कार की घोषणा करेगी : नायपॉल की बहन

नयी दिल्ली, 10 नवंबर त्रिनिदाद में बसे नायपॉल परिवार को हर साल अक्टूबर में यह उम्मीद होती थी कि नोबेल समिति विद्याधर सूरजप्रसाद नायपॉल को साहित्य पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा करेगी। नायपॉल की बहन सावी ने अपने संस्मरण ‘द नायपॉल्स ऑफ नेपॉल स्ट्रीट’ में इस बात का जिक्र किया है।

सावी ने पुस्तक में लिखा है, “अपनी पहली पुस्तक ‘द मिस्टिक मैसूर’ के प्रकाशन के 16 साल बाद यानी 1972 तक विद्या ने एक ऐसी साहित्यिक रचना तो रच ही ली थी, जो कम से कम नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकन पाने की हकदार थी।”

‘स्पीकिंग टाइगर बुक्स’ द्वारा प्रकाशित ‘द नायपॉल्स ऑफ नेपॉल स्ट्रीट’ में त्रिनिदाद में बसे नायपॉल के भारतीय मूल के परिवार से जुड़े कई यादगार किस्से साझा किए गए हैं।

सावी ने पुस्तक में लिखा है कि 1972 में जब ऑस्ट्रेलिया के पैट्रिक व्हाइट ने साहित्य का नोबेल जीता था, से लेकर 1992 तक जब सेंट लुसिया के डेरेक वॉलकॉट को इस पुरस्कार से नवाजा गया था, “हर साल अक्टूबर में नायपॉल परिवार की उम्मीदें परवान चढ़ जाती थीं, क्योंकि नोबेल विजेताओं के नाम की घोषणा अमूमन साल के इसी महीने में की जाती हैं।”

उन्होंने लिखा है, “हम हर रोज यह सुनने की उम्मीद करते थे कि समिति ने विद्या को चुना है। हालांकि, वॉलकॉट की जीत ने हममें से अधिकांश को एहसास करा दिया कि हमारी उम्मीदों पर हमेशा के लिए पानी फिर चुका है। दरअसल, इस बात की गुंजाइश बेहद कम थी कि स्वीडिश समिति कैरिबियाई क्षेत्र में जन्मे दो लेखकों को महज कुछ वर्षों के अंतराल पर इस पुरस्कार के लिए चुनेगी?”

सावी के मुताबिक, “इसके अलावा, समिति के बारे में कहा जाता था कि वह उदारवादी पूर्वाग्रह से ग्रस्त है और विद्या बहुत पहले ही इस श्रेणी से बाहर हो चुके थे। इस बीच, उन्होंने कई अन्य शीर्ष पुरस्कार और सम्मान हासिल करना जारी रखा, जिनके बारे में हमने पहले कभी नहीं सुना था।”

नायपॉल को 2001 में साहित्य के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था। नोबेल समिति ने उन्हें सम्मानित करते हुए कहा था कि “उनकी रचनाओं में बोधगम्य कथा और सटीकता का संयोजन है, जो हमें दमित इतिहास को देखने को बाध्य मजबूर करता है।”

सावी अक्टूबर 2001 के उस दिन को याद करते हुए लिखती हैं कि सुबह लगभग 6.30 बजे वह जिम में ट्रेडमिल पर दौड़ रही थीं, जब उन्हें खबर मिली कि “विद्या ने साहित्य श्रेणी का नोबेल पुरस्कार हासिल कर लिया है।”

वह बताती हैं, “मैं अपने भाई के लिए वास्तव में बेहद खुश थी। लेकिन मैं तब भावुक हो गई, जब मैंने अपने माता-पिता के बारे में सोचा, जो अब इस दुनिया में नहीं थे। मेरी आंखों से आंसू छलक पड़े।”

नायपॉल ने कथा साहित्य और गैर-कथा साहित्य में 30 से ज्यादा किताबें लिखीं। उनका सबसे लोकप्रिय उपन्यास ‘अ हाउस फॉर मिस्टर बिस्वास’ 1961 में प्रकाशित हुआ था। नायपॉल का 11 अगस्त, 2018 को लंदन में 85 साल की उम्र में निधन हो गया था।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)