नयी दिल्ली, 11 फरवरी अफगानिस्तान के लिए यूरोपीय संघ (ईयू) के विशेष दूत टॉमस निकलसन ने अफगान सरजमीं से पैदा हो रहे आतंकवाद के खतरे सहित युद्ध से जर्जर हो चुके देश में संपूर्ण स्थिति पर भारतीय वार्ताकारों के साथ पिछले दो दिनों में विस्तृत वार्ता की है। विषय की जानकारी रखने वाले लोगों ने यह बताया।
तालिबान शासन द्वारा अफगानिस्तान में लड़कियों की विश्वविद्यालय में शिक्षा पर पाबंदी लगाने के फैसले सहित मानवाधिकार हनन को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंताओं के बीच निकलसन भारत की यात्रा पर थे।
सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के अधिकारियों के साथ वार्ता में काबुल में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति का विषय प्रमुखता से उठा।
हाल में, बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के मद्देनजर कुछ देशों द्वारा काबुल स्थित अपने दूतावासों से राजनयिकों को वापस बुलाने की खबरें आई हैं।
सोमवार को, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल मास्को में एक सुरक्षा वार्ता में शरीक हुए थे, जिसमें अफगानिस्तान में संपूर्ण स्थित पर चर्चा की गई।
बैठक में अपने संबोधन में डोभाल ने कहा कि किसी भी देश को आतंकवाद फैलाने के लिए अफगान सरजमीं का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए और इसबात पर जोर दिया कि भारत जरूरत के समय में अफगानिस्तान के लोगों को कभी अकेला नहीं छोड़ेगा।
उल्लेखनीय है कि भारत ने अफगानिस्तान में तालिबान शासन को मान्यता नहीं दी है।
निकलसन ने शनिवार सुबह अपनी भारत यात्रा संपन्न की।
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