नयी दिल्ली, 11 फरवरी भारत ने ‘ऊर्जा बदलाव’ को लेकर गहरी समझ विकसित करने का आह्वान करते हुए मंगलवार को कहा कि प्रदूषणकारी जीवाश्म ईंधन से स्वच्छ स्रोतों की तरफ रुख केवल वहीं करना चाहिए, जहां विकासशील देशों की ज़रूरतें पूरा करने के लिए सस्ती ऊर्जा उपलब्ध हो।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने यहां ‘भारत ऊर्जा सप्ताह’ (आईईड्ब्ल्यू) के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि ऊर्जा बदलाव का मतलब किसी भी ईंधन का पूर्ण रूप से प्रतिस्थापन न होकर एक ऊर्जा स्रोत की जगह दूसरे स्रोत को प्राथमिकता देना है।
भारत जैसे विकासशील देश अपनी अधिकांश ऊर्जा मांग को कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों से पूरा करते हैं। हालांकि, प्रदूषणकारी स्रोतों से मिलने वाले ईंधन से हटकर नवीकरणीय ऊर्जा की तरफ रुख करने का आह्वान किया जा रहा है लेकिन भारत का मानना है कि यह कदम अचानक नहीं उठाया जा सकता है। इसकी वजह यह है कि बदलाव की प्रक्रिया में तेल एवं गैस के साथ कोयला भी ऊर्जा की मांग पूरी करने में अहम भूमिका निभाएगा।
पुरी ने कहा, ‘‘ऊर्जा बदलाव की अवधारणा के लिए गहरी समझ की जरूरत है। यह किसी ईंधन की पूरी तरह जगह लेने का मामला नहीं है, बल्कि एक ऊर्जा स्रोत की प्राथमिकता को दूसरे स्रोत पर स्थानांतरित करना है।’’
पेट्रोलियम मंत्री ने कहा, ‘‘ऊर्जा बदलाव का मतलब रातों-रात हाइड्रोकार्बन को खत्म करना नहीं है, बल्कि उत्सर्जन को कम करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ाते हुए रणनीतिक रूप से उनका लाभ उठाना है।’’
एक लंबे समय तक ऊर्जा बदलाव की प्रक्रिया को एकरेखीय यात्रा बताया जाता रहा है। इसका मतलब है कि यह बदलाव जीवाश्म ईंधन से नवीकरणीय ऊर्जा तक, अतीत से भविष्य तक, समस्या से समाधान तक एक रेखा में आगे बढ़ेगा।
हालांकि, पुरी ने इस संकल्पना से असहमति जताते हुए कहा, ‘‘नवीकरणीय ऊर्जा के प्रमुख स्रोत बन जाने पर भी तेल एवं गैस न केवल बिजली उत्पादन में बल्कि ग्रिड, औद्योगिक हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण नवाचार को स्थिर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ऊर्जा न्याय से नई ऊर्जा व्यवस्था को आकार मिलना चाहिए। सभी हितधारकों के लिए एक बात बिल्कुल स्पष्ट हो गई है कि ऊर्जा न्याय को आसन्न कायाकल्प के मूल में रहना चाहिए।’’
उन्होंने ऊर्जा बदलाव को न्यायसंगत बनाने पर जोर देते हुए कहा कि ऐसा न होने पर यह सफल ही नहीं होगा क्योंकि राजनीतिक अर्थव्यवस्था इसकी अनुमति नहीं देगी।
पुरी ने कहा कि दुनिया रणनीति के स्तर पर पुनर्मूल्यांकन देख रही है, जिसमें ऊर्जा बदलाव के दीर्घकालिक प्रयासों को जारी रखते हुए निकट-अवधि के मुनाफे को प्राथमिकता दी जा रही है।
इसके साथ ही पुरी ने कहा कि अब जलवायु परिवर्तन कोई आसन्न संकट नहीं रह गया है। यह कई गंभीर आपदाओं, जंगल की आग, बाढ़ और रिकॉर्डतोड़ तापमान के रूप में सामने आ रहा है, जो याद दिलाता है कि दुनिया के पास समय कम होता जा रहा है।
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