देश की खबरें | ईडी ने दो रियल्टी फर्म के खिलाफ छापेमारी में हजारों करोड़ रु की संपत्ति की पहचान की
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नयी दिल्ली, तीन मार्च प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को कहा कि उसने दिल्ली-एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में रियल्टी फर्म डब्ल्यूटीसी समूह और भूटानी ग्रुप के खिलाफ छापेमारी के दौरान हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति की पहचान की है।
केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक बयान में बताया कि 27 फरवरी को दिल्ली, नोएडा, फरीदाबाद और गुरुग्राम में डब्ल्यूटीसी समूह और उसके प्रवर्तक आशीष भल्ला तथा भूटानी समूह और उसके प्रवर्तक आशीष भूटानी से जुड़े एक दर्जन ठिकानों पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत छापे मारे गए।
बयान के मुताबिक, यह मामला दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) और फरीदाबाद पुलिस की ओर से डब्ल्यूटीसी समूह और उसके प्रवर्तकों आशीष भल्ला, सुपर्णा भल्ला, अभिजीत भल्ला तथा भूटानी इंफ्रा व अन्य के खिलाफ सैकड़ों घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और जालसाजी के आरोप में दर्ज दर्जनों प्राथमिकी से उपजा है।
ये प्राथमिकी सैकड़ों घर खरीदारों और निवेशकों की शिकायतों के आधार पर दर्ज की गई थीं।
भूटानी इंफ्रा ने पिछले हफ्ते एक बयान में कहा था कि उसने डब्ल्यूटीसी समूह के साथ सभी संबंध तोड़ लिए हैं और “अब वह ईडी की जांच में पूरा सहयोग कर रहा है।”
डब्ल्यूटीसी समूह की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
ईडी ने कहा कि दिल्ली पुलिस की ईओडब्ल्यू और फरीदाबाद पुलिस की ओर से दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि डब्ल्यूटीसी फरीदाबाद इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रवर्तकों ने आम जनता को शहर के सेक्टर 111-114 में अपनी आवासीय भूखंड परियोजना में निवेश करने के लिए “प्रलोभन” दिया।
जांच एजेंसी के अनुसार, प्रवर्तकों/निदेशकों ने एक “आपराधिक साजिश” रची और निर्धारित समय सीमा में परियोजना को पूरा नहीं करके तथा 10 साल से अधिक समय तक भूखंड “न सौंपकर” भूखंड खरीदारों की मेहनत की कमाई को “हड़प लिया।”
ईडी के अनुसार, प्राथमिकी में यह भी आरोप लगाया गया है कि भूटानी इंफ्रा समूह ने डब्ल्यूटीसी समूह का अधिग्रहण कर लिया है और फरीदाबाद सेक्टर 111-114 में परियोजना को फिर से शुरू किया है, जिससे भूखंड खरीदारों को “असमंजस” में रखा गया है, निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की गई है।
जांच एजेंसी ने कहा कि छापेमारी के दौरान दिल्ली-एनसीआर में 15 परियोजनाओं के लिए विभिन्न निवेशकों से 3,500 करोड़ रुपये से अधिक राशि वसूले जाने से संबंधित दस्तावेज मिले हैं।
हालांकि, ईडी ने यह नहीं बताया कि ये दस्तावेज कहां से बरामद किए गए हैं।
उसने कहा कि समूह (डब्ल्यूटीसी) की 15 प्रमुख परियोजनाओं में से बहुत कम में आवंटन किया गया है, जिससे “एक सुनियोजित पोंजी योजना”, अन्य संस्थाओं के नाम पर परिसंपत्तियों का निर्माण और विदेश में धन की हेराफेरी का संकेत मिलता है।
ईडी के मुताबिक, “छापेमारी के दौरान यह भी पता चला कि 200 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि सिंगापुर और अमेरिका भेजी गई, जो विदेशी परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के लिए विदेश में निवेश का संकेत है।”
जांच एजेंसी ने आरोप लगाया, “इसके अलावा, डब्ल्यूटीसी समूह और भूटानी ग्रुप से संबंधित आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनमें हजारों करोड़ रुपये के बाजार मूल्य वाली संपत्तियों को नाममात्र मूल्य पर भूटानी समूह को हस्तांतरित किए जाने का जिक्र है। इस तरह अपराध की आय (पीओसी) को नाममात्र मूल्य पर स्थानांतरित किया गया।”
ईडी ने कहा कि छापेमारी में नकदी के लेनदेन से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं।
जांच एजेंसी ने बताया कि उसने धन के हेरफेर और संपत्तियों की बिक्री एवं पंजीकरण से जुड़े “आपत्तिजनक” दस्तावेजों के अलावा लैपटॉप, हार्ड ड्राइव आदि उपकरण भी बरामद किए हैं।
ईडी के अनुसार, “इसके अलावा, डब्ल्यूटीसी समूह के नाम पर हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति की पहचान की गई है।”
जांच एजेंसी ने बताया कि डब्ल्यूटीसी समूह की कंपनियों की सावधि जमा (एफडी) को फ्रीज कर दिया गया है और 1.5 करोड़ रुपये मूल्य के सोना-चांदी के आभूषण व सोने की ईंटें भी जब्त कर ली गई हैं।
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