जरुरी जानकारी | ई-वाणिज्य नीति का मसौदा जल्द होगा सार्वजनिक, स्टार्टअप को अधिक कर छूट पर हो रहा विचार: डीपीआईआईटी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) टिप्पणियों व सुझावों के लिये शीघ्र ही ई-वाणिज्य नीति के मसौदे को सार्वजनिक करेगा। इसके साथ ही उभरते उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिये इस बात पर विचार किया जा रहा है कि स्टार्टअप उपक्रमों को प्रत्यक्ष व परोक्ष कर व्यवस्था के तहत किस तरह की और छूट दी जा सकती हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को इसकी जानकारी दी।
नयी दिल्ली, 30 मई उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) टिप्पणियों व सुझावों के लिये शीघ्र ही ई-वाणिज्य नीति के मसौदे को सार्वजनिक करेगा। इसके साथ ही उभरते उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिये इस बात पर विचार किया जा रहा है कि स्टार्टअप उपक्रमों को प्रत्यक्ष व परोक्ष कर व्यवस्था के तहत किस तरह की और छूट दी जा सकती हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को इसकी जानकारी दी।
डीपीआईआईटी के सचिव गुरुप्रसाद महापात्रा ने राजस्थान सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से आयोजित राजस्थान स्ट्राइड संगोष्ठी में कहा कि ई-वाणिज्य तेजी से उभरता क्षेत्र है और यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि अगले कुछ साल में यह किधर जायेगा।
उन्होंने कहा कि अभी तक देश में ई-वाणिज्य नीति नहीं है, लेकिन विभाग अब इस पर तेजी से काम कर रहा है।
महापात्रा ने इस मौके पर यह भी बताया कि डीपीआईआईटी और राजस्व विभाग उभरते उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिये स्टार्टअप उपक्रमों को प्रत्यक्ष व परोक्ष कर व्यवस्था के तहत दी जा सकने वाली छूटों के बारे में साथ मिलकर विचार कर रहा है।
यह भी पढ़े | बिहार: बक्सर के क्वारंटीन सेंटर में युवक की खुराक जानकार सभी दंग, खाता है 40 रोटियां, 10 प्लेट चावल.
सरकार ने पिछले साल फरवरी में राष्ट्रीय ई-वाणिज्य नीति का मसौदा जारी किया था। उस मसौदे में दूसरे देशों के साथ डेटा प्रवाह पर रोक लगाने के लिये वैधानिक व तकनीकी रूपरेखा तैयार करने का प्रस्ताव किया गया है। इसके अलावा उस मसौदे में संवेदनशील डेटा को स्थानीय स्तर पर इकट्ठा करने और उन्हें देश से बाहर भंडारित करने के बारे में व्यवसायों के लिये शर्तों का भी प्रस्ताव किया गया है।
उक्त मसौदे पर कई विदेशी ई-वाणिज्य कंपनियों ने आपत्तियां जतायी हैं।
महापात्रा ने कहा कि पिछले साल फरवरी में पहला मसौदा जारी करने के बाद आम चुनाव का समय आ गया। इसके अलावा मसौदा नीति को लेकर कई आपत्तियां भी प्राप्त हुईं।
उन्होंने कहा, ‘‘अब देश में स्पष्ट व निर्णायक ई-वाणिज्य नीति का समय आ गया है।’’
उन्होंने कहा कि दोनों विभाग मंत्रिमंडल को स्टार्टअप से संबंधित विस्तृत ‘विजन डॉक्यूमेंट’ सौंपने वाले हैं। दस्तावेज में कई कदम सुझाये गये हैं।
महापात्रा ने विचार किये जा रहे कुछ उपायों की जानकारी देते हुए कहा कि डीपीआईआईटी ‘फंड ऑफ फंड्स’ के जरिये स्टार्टअप उपक्रमों के लिये इस साल अधिक कोष मुहैया करायेगा। पिछले साल इस माध्यम से एक हजार करोड़ रुपये उपलब्ध कराये गये थे।
उन्होंने कहा, ‘‘अभी राजस्व विभाग की कराधान टीम और डीपीआईआईटी की स्टार्टअप इंडिया टीम साथ मिलकर यह परख रही है कि प्रत्यक्ष व परोक्ष कर व्यवस्थाओं के तहत किस तरह की छूटें दी जा सकती हैं। हम विनिर्माण गतिविधियों में शामिल स्टार्टअप उपक्रमों को केंद्र सरकार की सार्वजनिक खरीद योजना में जगह देकर उन्हें विपणन में भी मदद मुहैया कराने की कोशिश कर रहे हैं।’’
डीपीआईआईटी सचिव ने कहा कि विजन डॉक्यूमेंट में शामिल मुख्य उपायों में फंड ऑफ फंड्स के तहत उपलब्ध कोष को बढ़ाना, सीड मनी योजना, क्रेडिट गारंटी योजना और सभी विभागों के लिये इनक्यूबेटर्स व हैंड होल्ड स्टार्टअप उपक्रमों को बढ़ावा देना अनिवार्य किया जाना आदि शामिल हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हम जो कर रहे हैं, वह दरअसल उनके लिये (स्टार्टअप के लिये) चीजों को आसान बनाना है।’’
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)